भचक्र के 360 अंशों को 12 भागों में बांटा गया है। इनमें से हर भाग 30 डिग्री का है। इस भाग को भाव कहते हैं। जब कोई कुण्डली हमारे सामने आती है तो उसमें बारह खाने बने हुए होते हैं। इनमें से सबसे ऊपर वाला पहला भाव होता है। कुण्डली के भावों को कुछ इस तरह से बताया जा सकता है। जिस भाव में जो संख्या लिखी है वह भाव की संख्या है। पहला भाव कुण्डली का सबसे महत्वपूर्ण भाव होता है। इसे लग्न कहते हैं। जातक के जन्म के समय यही भाव पूर्व दिशा में उदय हो रहा होता है। लग्न से जातक की आत्मा, मूल स्वभाव, उसका स्वास्थ्य देखा जाता है। अन्य विषयों के विश्लेषण के दौरान भी लग्न की स्थिति प्रमुखता से देखी जाती है। यदि लग्न मजबूत होता है तो कुण्डली अपने आप दुरुस्त हो जाती है। अगर किसी जातक की कुण्डली में लग्न खराब हो रहा हो तो पहले उसी का उपचार किया जाता है।
रविवार, अक्टूबर 05, 2025
ज्योतिष कक्षा: 3सरा दिन - राशियां, भाव और भावेश
भचक्र के 360 अंशों को 12 भागों में बांटा गया है। इनमें से हर भाग 30 डिग्री का है। इस भाग को भाव कहते हैं। जब कोई कुण्डली हमारे सामने आती है तो उसमें बारह खाने बने हुए होते हैं। इनमें से सबसे ऊपर वाला पहला भाव होता है। कुण्डली के भावों को कुछ इस तरह से बताया जा सकता है। जिस भाव में जो संख्या लिखी है वह भाव की संख्या है। पहला भाव कुण्डली का सबसे महत्वपूर्ण भाव होता है। इसे लग्न कहते हैं। जातक के जन्म के समय यही भाव पूर्व दिशा में उदय हो रहा होता है। लग्न से जातक की आत्मा, मूल स्वभाव, उसका स्वास्थ्य देखा जाता है। अन्य विषयों के विश्लेषण के दौरान भी लग्न की स्थिति प्रमुखता से देखी जाती है। यदि लग्न मजबूत होता है तो कुण्डली अपने आप दुरुस्त हो जाती है। अगर किसी जातक की कुण्डली में लग्न खराब हो रहा हो तो पहले उसी का उपचार किया जाता है।
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
ज्योतिष की कक्षा - पांचवां दिन
अब तक हमने पढ़ा है ज्योतिष की जरूरत क्यों है, ग्रह, नक्षत्र और राशियां क्या है और पिछली पोस्ट में हमने राशियों से परिचय प्राप्त करना शुरू किया था। मेष, वृष और मिथुन राशि के बाद आज हम पढ़ेंगे कर्क राशि के बारे में। हालांकि मैं इन राशियों के बारे में छोटी छोटी जानकारी ही दे रहा हूं, लेकिन ये वह जानकारी है जिसे पढ़ने के बाद आप जातक को देखकर अनुमान लगा सकते हैं कि यह किस राशि का जातक हो सकता है। या किस राशि का प्रभाव जातक पर अधिक है। इस बारे में विशद जानकारी के लिए आपको ज्योतिष रत्नाकर और फण्डामेंटल प्रिंसीपल ऑफ एस्ट्रोलॉजी पुस्तकें भी पढ़नी चाहिए। अगर आप पढ़ेंगे नहीं तो... अब क्या कहें।
सर्वाधिक राजयोग बनाने वाली कर्क राशि
दरअसल मुझे पहली बार इस राशि का परिचय ऐसे ही प्राप्त हुआ था। आप गौर कीजिए कि कर्क लग्न होने पर कुण्डली क्या बनेगी।
इस कुण्डली में चारों केन्द्र ऐसे हैं जिनमें ग्रह उच्च के होते हैं। लग्न में कर्क राशि में गुरु आएगा तो उच्च का होगा, चौथे भाव में शनि उच्च का होगा, सातवें भाव में मंगल और दसवें भाव में सूर्य उच्च का होगा। इसके अलावा लग्न से ग्यारहवां भाव आय का है। चंद्रमा अगर उच्च का हुआ तो इस भाव में होगा। सूर्य, बुध और शुक्र के सर्वाधिक संबंध बनते हैं। ऐसे में कर्क लग्न वालों के धन और आय के संबंध के योग भी कमोबेश अधिक बनते हैं। शुक्र बेहतर होने पर पैसा और प्रसिद्धि साथ साथ मिलते हैं। किसी भी लग्न में पाया जाने वाला यह दुर्लभ योग है जो कर्क में सहजता से उपलब्ध होता है। इन सभी बिंदुओं के चलते कर्क लग्न को राजयोग का लग्न कहा गया है।
कर्क राशि की विशेषताएं
यह पृष्ठ से उदय होने वाली राशि है। इनका बेढंगा शरीर, दुर्बल अवयव और शक्तिशाली पंजा होता है। इनके शरीर का ऊपर हिस्सा बड़ा होता है। उम्र बढ़ने के साथ इनकी तोंद भी बढ़ती जाती है। केश कत्थई और भूरापन लिए होते हैं। अस्थिर चेतना वाले इन जातकों की जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आते हैं। चंद्र का आधिपत्य इन्हें उर्वर कल्पनाशीलता होती है। धन संपन्नता या सम्मान की स्थिति पाने के लिए ये लोग दक्षता से जन समूह को प्रेरित कर देते हैं। ये लोग घर परिवार औ सुख की कामना करते हैं। उपहास और समालोचना का भय इन्हें विचारशील, कूटनीतिज्ञ और लौकिक बना देता है। जातक का स्वास्थ्य जवानी में खराब रहता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सुधरता जाता है। इस राशि वाले जातकों के लिए मंगलवार का दिन शुभ होता है। हस्तलेखन अस्थिर होता है, शुभ रंग श्वेत, क्रीम और लाल है। शुक्रवार को ये लोग आनन्द और लाभ अर्जित कर सकते हैं।
कर्क राशि से प्रभावितों के उदाहरण
भारतीय राज व्यवस्था में कर्क राशि का बड़ा महत्व रहा है। आजानुभुज राम कर्क लग्न के थे। उनकी कुण्डली में सूर्य, मंगल, गुरु, शनि, शुक्र और चंद्रमा उच्च के थे। वर्तमान दौर में इंदिरा गांधी, अटलबिहारी वाजपेयी और अब सोनिया गांधी की कुण्डली कर्क लग्न की बताई जाती है। मैंने खुद ने अब तक ये कुण्डलियां देखी नहीं है इसलिए मैंने लिखा बताई जाती हैं, अटल बिहारी वाजपेयी की कुण्डली तो जिस ज्योतिषी ने देखी उन्होंने ही मुझे बताया कि उनके कर्क लग्न और लग्न में शनि है।
लेख बड़ा हो गया इसलिए इस बार केवल कर्क राशि का ही विश्लेषण करेंगे। अगली कक्षा में हम बात करेंगे सिंह और कन्या राशि की...
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
Encyclopedia of astrological remedies : LALA KITAB
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बुधवार, फ़रवरी 08, 2012
Naptune cycle in houses
नेप्च्यून (Naptune) को एक राशिचक्र (Cycle) पूरा करने में तकरीबन 164 साल का समय लगता है। एक सामान्य व्यक्ति को इतनी लंबी अवधि तक जिंदा नहीं रहता है। दूसरी बात यह भी है कि कोई एक ज्योतिषी नेप्च्यून के प्रभावों का अध्ययन करने जितना भी नहीं जी सकता। ऐसे में प्राचीन घटनाओं, महापुरुषों की जीवनियों और इतिहास के साक्ष्यों को नेप्च्यून के गोचर के साथ मिलाकर अध्ययन कर कुछ निष्कर्ष निकाले गए हैं। रहस्य के मालिक इस ग्रह के विभिन्न भावों में प्रभावों के बारे में कई जगह बताया गया है। नेप्च्यून के अधिकार की राशि गुरु की दूसरी और भचक्र की आखिरी राशि मीन दी गई है। इसी के साथ बारहवां भाव भी नेप्च्यून का प्रिय भाव बताया गया है। इस नए नवेले और धीमे चलने वाले ग्रह के बारे में कुछ पश्चिमी पुस्तकों से मिली जानकारी को संक्षेप में यहां पेश करने का प्रयास कर रहा हूं। इसी के साथ कुण्डलियों पर इस ग्रह के स्थाई प्रभाव के बारे में अध्ययन जारी है। इसे master of disguise भी कहा जाता है।
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बुधवार, नवंबर 02, 2011
सोच की गति से पैसा
देखने में यह काल्पनिक विषय है लेकिन ऐसा होता है। जो लोग सालों तक बिजनेस में लगे रहते है उन्हें पता है कि एक समय ऐसा भी होता है जब सोच की गति से पैसा बनना शुरू हो जाता है। हालांकि हर समय ऐसा नहीं होता। जिन लोगों के जीवनकाल में ऐसा वक्त आकर जा चुका होता है वे बार-बार ज्योतिषियों के पास जाते हैं और अपने उसी दौर को फिर से जीने की कोशिश करते हैं।
ज्योतिष की नजर में क्या होता है सोच की गति से पैसा बनाना और कितने लोग सफल होते हैं इस प्रकार धन कमाने में। यह बताने से पहले मैं स्पष्ट करता हूं कि प्रकृति के अनुसार लोग चार प्रकार के होते हैं। यह प्रकृति राशियों के आधार पर बनाई गई है।
मेष, सिंह और धुन राशियां अग्नितत्वीय होती हैं,
वृष, कन्या और मकर राशियां पृथ्वीतत्वीय होती हैं,
मिथुन, तुला और कुंभ राशियां वायुतत्वीय होती हैं
कर्क, वृश्चिक और मीन राशियां जलतत्वीय होती हैं।
इन्हीं राशियों के आधार पर लोग भी चार प्रकार के होते हैं। हर प्रकार के व्यक्ति की कुण्डली में ऐसा वक्त जरूर आता है जब वह अपने मूल तत्व, कारक ग्रह, उसकी दशा और घटनाओं के प्रति सामंजस्य बैठा लेता है। यही वक्त होता है जब व्यवसायी सोच की गति से पैसा बना पाता है। अब एक आम आदमी का सवाल होता है कि उसे कैसे पता चलेगा कि उसका ‘वह’ वक्त आ गया है। इसे जानने के लिए आपको पता करना होगा कि आपकी कुण्डली का लग्न अथवा राशि कौनसी है। कुछ कुण्डलियां लग्न से ऑपरेट होती हैं तो कुछ राशि से। ऐसे में जो अधिक प्रभावी है वहीं से देखा जाएगा। इसके बाद हर लग्न की कुण्डली का एक निश्चित कारक ग्रह होता है। उस कारक ग्रह की दशा में ही हमारे प्रयासों के उत्कृष्ट परिणाम आते हैं। जैसे कि मेष लग्न की कुण्डली में सूर्य की दशा में और तुला लग्न की कुण्डली में शनि की दशा में सर्वाधिक अच्छे परिणाम आएंगे।
तो कुछ लोगों का सवाल यह भी होता है कि कारक ग्रह की दशा से पहले क्या किया जाए। इसके लिए मेरा जवाब यही है कि कारक ग्रह की दशा आने से पूर्व तक आपको इसकी तैयारी करनी होती है। अगर कारक ग्रह की दशा से पहले पर्याप्त ठोस जमीन तैयार नहीं की गई होगी तो कारक दशा बीतने तक आप परिस्थितियों को अनुकूल बनाते रहेंगे और बेहतर परिणामों के लिए फिर से किसी अंतरदशा या प्रत्यंतर दशा का इंतजार करना पड़ेगा। यानि काम करते रहना होगा, सही समय आने पर उसके बेहतरीन परिणाम में आएंगे। वैसे हर एक की कुण्डली का व्यक्तिगत विश्लेषण कर ही निकाला जा सकता है कि अमुक व्यक्ति का स्वर्णकाल कब आ रहा है।
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मंगलवार, अप्रैल 21, 2009
अगर कोई बालक अंतरिक्ष में पैदा हो तो...
अगर कोई बालक अंतरिक्ष में पैदा हो तो उसकी कुण्डली क्या होगी?

फलित ज्योतिष की पुस्तकें पढ़कर फलादेश शुरू कर देने वाले ज्योतिषियों को एक सवाल पिछले कई दिनों से पूछा जा रहा है। मेरी भी लगभग यही श्रेणी मानी जाती है इसलिए मुझे भी यही सवाल पूछा गया। सवाल सुनते ही मेरे दिमाग में भौतिक का वह सवाल कौंध गया जिसमें पूछा गया है कि धरती से चंद्रमा की ओर जा रहे किसी यान की एक विशेष स्थिति में गतिक और स्थैतिक ऊर्जा क्या होगी। क्या इसे निकाला जा सकता है। इस सवाल में अंतरिक्ष में बालक पैदा हो रहा था, लेकिन कहां इस बारे में स्पष्ट नहीं था। मेरे दिमाग में अंतरिक्ष यान था जिसमें कि बालक पैदा हो सकता होगा।
प्रेक्टिकली हो सकता है या नहीं यह बात अलग है लेकिन अगर... हो भी तो खुले अंतरिक्ष में तो कतई पैदा नहीं सकता। ऐसे में मेरे दिमाग में पहले पहल यही ख्याल आया कि अंतरिक्ष यान में पैदा हो रहा है। इसके साथ ही मैंने यह भी सोच लिया कि वह धरती से चंद्रमा की ओर जा रहा है। जबकि सवाल यह है ही नहीं। बस इतना है कि पृथ्वी से अलग दूर अंतरिक्ष में बालक पैदा हो तो उसकी कुण्डली क्या होगी। इससे मुझे यह समझ में आया कि जिस तरह पृथ्वी के कॉर्डिनेट्स हैं वैसे ही अंतरिक्ष के कॉर्डिनेट्स भी होंगे। इन कॉर्डिनेट्स के अनुसार पहले यह तय करना होगा कि बच्चा अंतरिक्ष में कहां है। फिर पृथ्वी पर मिलने वाले पांचांगों के इतर एक अन्य गणना तय करनी होगी जिसमें अंतरिक्ष के उस बिंदू से ग्रहों की विभिन्न नक्षत्रों में स्थिति का वर्णन स्पष्ट हो। यह निकालने योग्य होना चाहिए। यानि मेहनत की जाए तो शायद निकाला जा सकता है। इसके बाद जो कुण्डली बनेगी उसमें ग्रहों का प्रभाव और नक्षत्रों का फल पृथ्वी के किसी जातक से भिन्न होना चाहिए। क्योंकि अब किरणों का प्रभाव और वातवरण पूर्णतया बदल चुके हैं।
अंतरिक्ष यान से पृथ्वी उदय होते हुए का दृश्य
अब कुछ सवाल और पैदा और होते हैं
गुणी ज्योतिषी बता सकते हैं कि ऐसी स्थिति में बालक के जन्म को लेकर कैसे फलादेश निकाले जा सकेंगे।
? क्या बालक की कुण्डली में एक ग्रह पृथ्वी भी जुड़ जाएगा,
? सूर्य और चंद्र के सन्निपात से उत्पन होने वाले राहू और केतू का क्या होगा,
? चंद्रमा का प्रभाव कितना बचेगा,
? जब गुरूत्वाकर्षण नहीं है तो क्या फलों में कुछ परिवर्तन होगा
? क्या बालक के पृथ्वी पर लौटने के समय को लेकर उसकी कुण्डली बनाई जाए,
? क्या कुछ अतिरिक्त ग्रह भी कुण्डली में जुड़ेंगे,
? क्या निकटस्थ ग्रह की भूमिका बढ़ जाएगी या कम हो जाएगी,
? पृथ्वी पर तत्व तो पांच ही हैं फिर अंतरिक्ष में कितने तत्व शामिल किए जाएंगे,
? किसे लग्न मानेंगे और यह किस ओर से उदय होगा ?
कुछ हजार सवाल और पैदा हो रहे हैं इस स्थिति पर, फिलहाल इतने ही,
कुछ आप भी सुझाएं :)
यह तस्वीरें NASA Image of the Day से ली गई है
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
गुरुवार, मार्च 05, 2009
Exaltation or debilitation of planet : And it's meaning
GAM STONE LAL KITAB SIDHARTH JOSHI FALADESH JYOTISH KUNDALI JYOTISH DARSHAN ASTROLOGY SIGNS MESHA VRISHUBHA MITHUNA KARKA SIMHA KANYA TULA VRISHCHIKA DHANU MAKAR KUMBHA MEENA ARIES TAURUS GEMINI CANCER LEO VIRGO LIBRA SCORPIO SAGITTARIUS CAPRICORNAQUARIUS PISCES SUN MOON MARS MERCURY JUPITER VENUS SATURN DRAGON HEAD TAIL SURYA CHANDRA MANGAL BUDH GURU BRIHASPATI SHUKRA SHANI RAHU KETU LAGNA DWITIYA TRITIYA CHATURTHA PANCHAM SHASHTHAM SAPTAM ASHTAM NAVAM DASHAM EKADASH DWADASH HOUSE HOROSCOPE ASTROLOGER SUNHARI KITAB VADIC MANTRA TANTRA UPAAY FAMILY CHILD CHILDREN ASTRO HEALTH WEALTH MAKAAN HOUSE STUDY GROUP BUSINESS CAREER VAAHAN CAR ONLINE CONSULTANCY ASTRO SALAAH PANDIT JANM PATRIKA
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