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रविवार, अक्टूबर 05, 2025

फलादेश में कारकों की भूमिका...

कारक विचार फलादेश की सबसे महत्‍वपूर्ण कड़ी है। कई बार जातक जब समस्‍या बताता है तो नए ज्‍योतिषियों को पता ही नहीं चलता है कि इसे किस भाव या ग्रह से देखें। ऐसे में जितने कारक फौरी तौर पर ध्‍यान में होते हैं, उन्‍हीं के अनुसार ज्‍योतिषी निष्‍कर्ष पेश करने की कोशिश करते हैं। कई बार तो यह भी स्‍पष्‍ट नहीं हो पाता है कि सवाल का जवाब कुण्‍डली में कहां खोजा जाए। हेमवंता नेमासा काटवे की कारकत्‍व विचार पुस्‍तक में इतने कारक दिए गए हैं कि लगता है कि हर सवाल का जवाब दिया जा सकता है। इसके अलावा केएस कृष्‍णामूर्ति की फण्‍डामेंटल प्रिंसीपल ऑफ एस्‍ट्रोलॉजी पुस्‍तक में कारकों की एक लंबी शृंखला उपलब्‍ध होती है। अगर हमें कारकों के बारे में स्‍पष्‍ट जानकारी हो तो कमोबेश हर सवाल का जवाब से दिया जा सकता है। आइए देखते हैं कि भावों के अनुसार कारक कौनसे होते हैं।

प्रथम भाव

इस भाव का कारक सूर्य है। यह सबसे प्रमुख भाव है। इसी भाव की राशि, इसमें बैठे ग्रह और इसके अधिपति ग्रह की स्थिति से जातक की स्थिति की प्राथमिक जानकारी मिल जाती है। बाकी भावों की तुलना में जातक की आत्‍मा को जानने का यह सबसे महत्‍वपूर्ण भाव है। जातक की जन्‍मकुण्‍डली अथवा प्रश्‍नकुण्‍डली के किसी सवाल के जवाब में उसके स्‍वास्‍थ्‍य, जीवंतता, सामूहिकता, व्‍यक्तित्‍व, आत्‍मविश्‍वास, आत्‍मसम्‍मान, आत्‍मप्रकाश, आत्‍मा आदि को देखा जाता है। हर सवाल के जवाब में पहले लग्‍न देखना ही होगा। ऐसे में लग्‍न की राशि, इसमें स्थित ग्रह और लग्‍न पर प्रभावों के अनुसार कारकत्‍व का निर्धारण किया जाएगा।

दूसरा भाव

इस भाव का कारक गुरु है। ज्‍योतिष में इसे धन भाव कहा जाता है। इससे बैंक एकाउण्‍ट, पारिवारिक पृष्‍ठभूमि, कई मामलों में आंखें देखी जाती है। यह भाव संसाधन, नैतिक मूल्‍य और गुणों के बारे में बताता है। किसी भी जातक का परिवार कितना बड़ा या छोटा है अथवा स्‍थावर संपत्ति की क्‍या स्थिति है, इसी भाव से देखेंगे।

तीसरा भाव

इस भाव का कारक मंगल है। इसे सहज भाव भी कहते हैं। कुण्‍डली को ताकत देने वाला भाव यही है। भाग्‍य के इतर अपनी बाजुओं की ताकत से कुछ कर दिखाने वाले लोगों का यह भाव बहुत शक्तिशाली होता है। बौद्धिक विकास, साहसी विचार, दमदार आवाज, प्रभावी भाषण एवं संप्रेषण के अन्‍य तरीके इस भाव से देखे जाएंगे। छोटी अवधि की यात्राएं और छोटे भाई के लिए भी इसी भाव को देखा जाएगा।

चौथा भाव

इसका कारक चंद्रमा है। यह सुख का घर है। किसी के घर में कितनी शांति है इस भाव से पता चलेगा। इसके अलावा माता के स्‍वास्‍थ्‍य और घर कब बनेगा जैसे सवालों में यह भाव प्रबल संकेत देता है। शांति देने वाला घर, सुरक्षा की भावना, भावनात्‍मक स्थिति, पारिवारिक प्रेम जैसे बिंदुओं के लिए हमें चौथा भाव देखना होगा। यह भाव वाहन सुख के बारे में भी जानकारी देता है।

पांचवां भाव

इसका कारक गुरु है। इसे उत्‍पादन भाव भी कह सकते हैं। इंसान क्‍या पैदा करता है, वह इसी भाव से आएगा। इसमें शिष्‍य और पुत्र से लेकर पेटेंट वाली खोजें और कृतियां तक शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा आनन्‍दपूर्ण सृजन, सुखी बच्‍चे, सफलता, निवेश, जीवन का आनन्‍द, सत्‍कर्म जैसे बिंदुओं को जानने के लिए इस भाव को देखा जाता है।

छठा भाव

इस भाव का कारक मंगल है। इसे रोग का घर भी कहते हैं। प्रेम के सातवें घर से बारहवां यानि खर्च का घर है। शत्रु और शत्रुता भी इसी भाव से देखे जाते हैं। कठोर परिश्रम, सश्रम आजीविका, स्‍वास्‍थ्‍य, घाव, रक्‍तस्राव, दाह, सर्जरी, डिप्रेशन, उम्र चढ़ना, कसरत, नियमित कार्यक्रम के सम्‍बन्‍ध में यह भाव संकेत देता है।

सातवां भाव

इसका कारक शुक्र है। लग्‍न को देखने वाला यह भाव किसी भी तरह के साथी के बारे में बताता है। राह में साथ जा रहे दो लोगों के लिए, प्रेक्टिकल के लिए टेबल शेयर कर रहे दो विद्यार्थियों के लिए, एक ही समस्‍या में घिरे दो साथ-साथ बने हुए लोगों के लिए यह भाव देखा जाएगा। जीवनसाथी, व्‍यावसायिक भागीदार, करीबी दोस्‍त, सुंदरता, लावण्‍य जैसे विषय इसी भाव से जुड़े हुए हैं। सभी विपरीत लिंग वालों के लिए।

आठवां भाव

इसका कारक शनि है। स्‍वाभाविक रूप से गुप्‍त क्रियाओं, अनसुलझे मामलों, आयु, धीमी गति के काम इससे देखे जाएंगे। इसके अलावा दूसरे के संसाधनों का सृजन में इस्‍तेमाल, जिंदगी की जमीनी सच्‍चाइयां, तंत्र-मंत्र के लिए यही भाव है।

नौंवां भाव

इसका कारक भी गुरु है। इसे भाग्‍य भाव भी कहते हैं। पिछले जन्‍म में किए गए सत्‍कर्म प्रारब्‍ध के साथ जुड़कर इस जन्‍म में आते हैं। यह भाव हमें बताता है कि हमारी मेहनत और अपेक्षा से अधिक कब और कितना मिल सकता है। धर्म, अध्‍यात्‍म, समर्पण, आशीर्वाद, बौद्धिक विकास, सच्‍चाई से प्रेम, मार्गदर्शक जैसे गुणों को भी इसमें देखा जाता है।

दसवां भाव

इसके कारक ग्रह अधिक हैं। गुरु, सूर्य, बुध और शनि के पास दसवें घर का कारकत्‍व है। हम जो सोचते हैं वही बनते हैं। यह भाव हमारी सोच को कर्म में बदलने वाला भाव है। हर तरह का कर्म दसवें भाव से प्रेरित होगा। बस बाध्‍यता इतनी है कि क्रिया हमारी होनी चाहिए। प्रतिक्रिया के बारे में यह भाव नहीं बताता। व्‍यावसायिक सफलताएं, साख, प्रसिद्धि, नेतृत्‍व, लेखन, भाषण, सफल संगठन, प्रशासन, स्किल बांटना जैसे काम यह भाव बताता है।

ग्‍यारहवां भाव

इसका कारक भी गुरु है। यह ज्‍यादातर उपलब्धि से जुड़ा भाव है। आय, प्रसिद्ध, मान सम्‍मान और शुभकामनाएं तक यह भाव एकत्रित करता है। हम कुछ करेंगे तो उस कर्म का कितना फल मिलेगा या नहीं मिलेगा, यह भाव अधिक स्‍पष्‍ट करता है। यह कर्म का संग्रह भाव है। उपलब्धि किसी भी क्षेत्र में हो सकती है। धैर्य, विकास और सफलता भी इसी भाव से देखे जाते हैं।

बारहवां भाव

इसका कारक शनि है। यह खर्च का घर है। हर तरह का खर्च, शारीरिक, मानसिक, धन और जो भी खर्च हो सकते हैं सभी इसी से आएंगे। विद्या का खर्च भी इसी भाव से होता है। इस कारण बारहवें भाव में बैठा गुरु बेहतर होता है ग्‍यारहवें भाव की तुलना में क्‍योंकि सरस्‍वती की उल्‍टी चाल होती है, जितना संग्रह करेंगे उतनी कम होगी और जितना खर्च करेंगे उतनी बढ़ेगी। इसके अलावा बाहरी सम्‍बन्‍धों, विदेश यात्रा, धैर्य, ध्‍यान और मोक्ष इस भाव से देखे जाएंगे।

बुधवार, नवंबर 02, 2011

सोच की गति से पैसा

देखने में यह काल्‍पनिक विषय है लेकिन ऐसा होता है। जो लोग सालों तक बिजनेस में लगे रहते है उन्‍हें पता है कि एक समय ऐसा भी होता है जब सोच की गति से पैसा बनना शुरू हो जाता है। हालांकि हर समय ऐसा नहीं होता। जिन लोगों के जीवनकाल में ऐसा वक्‍त आकर जा चुका होता है वे बार-बार ज्‍योतिषियों के पास जाते हैं और अपने उसी दौर को फिर से जीने की कोशिश करते हैं।

guy with money thoughtज्‍योतिष की नजर में क्‍या होता है सोच की गति से पैसा बनाना और कितने लोग सफल होते हैं इस प्रकार धन कमाने में। यह बताने से पहले मैं स्‍पष्‍ट करता हूं कि प्रकृति के अनुसार लोग चार प्रकार के होते हैं। यह प्रकृति राशियों के आधार पर बनाई गई है।

मेष, सिंह और धुन राशियां अग्नितत्‍वीय होती हैं,

वृष, कन्‍या और मकर राशियां पृथ्‍वीतत्‍वीय होती हैं,

मिथुन, तुला और कुंभ राशियां वायुतत्‍वीय होती हैं

कर्क, वृश्चिक और मीन राशियां जलतत्‍वीय होती हैं।

इन्‍हीं राशियों के आधार पर लोग भी चार प्रकार के होते हैं। हर प्रकार के व्‍यक्ति की कुण्‍डली में ऐसा वक्‍त जरूर आता है जब वह अपने मूल तत्‍व, कारक ग्रह, उसकी दशा और घटनाओं के प्रति सामंजस्‍य बैठा लेता है। यही वक्‍त होता है जब व्‍यवसायी सोच की गति से पैसा बना पाता है। अब एक आम आदमी का सवाल होता है कि उसे कैसे पता चलेगा कि उसका ‘वह’ वक्‍त आ गया है। इसे जानने के लिए आपको पता करना होगा कि आपकी कुण्‍डली का लग्‍न अथवा राशि कौनसी है। कुछ कुण्‍डलियां लग्‍न से ऑपरेट होती हैं तो कुछ राशि से। ऐसे में जो अधिक प्रभावी है वहीं से देखा जाएगा। इसके बाद हर लग्‍न की कुण्‍डली का एक निश्चित कारक ग्रह होता है। उस कारक ग्रह की दशा में ही हमारे प्रयासों के उत्‍कृष्‍ट परिणाम आते हैं। जैसे कि मेष लग्‍न की कुण्‍डली में सूर्य की दशा में और तुला लग्‍न की कुण्‍डली में शनि की दशा में सर्वाधिक अच्‍छे परिणाम आएंगे।

तो कुछ लोगों का सवाल यह भी होता है कि कारक ग्रह की दशा से पहले क्‍या किया जाए। इसके लिए मेरा जवाब यही है कि कारक ग्रह की दशा आने से पूर्व तक आपको इसकी तैयारी करनी होती है। अगर कारक ग्रह की दशा से पहले पर्याप्‍त ठोस जमीन तैयार नहीं की गई होगी तो कारक दशा बीतने तक आप परिस्थितियों को अनुकूल बनाते रहेंगे और बेहतर परिणामों के लिए फिर से किसी अंतरदशा या प्रत्‍यंतर दशा का इंतजार करना पड़ेगा। यानि काम करते रहना होगा, सही समय आने पर उसके बेहतरीन परिणाम में आएंगे। वैसे हर एक की कुण्‍डली का व्‍यक्तिगत विश्‍लेषण कर ही निकाला जा सकता है कि अमुक व्‍यक्ति का स्‍वर्णकाल कब आ रहा है।

मंगलवार, दिसंबर 14, 2010

राफेल की मुण्‍डेन ज्‍योतिष

मुण्‍डेन ज्‍योतिष के बारे में बहुत कम लिखा गया है। वास्‍तव में यह विषय शुरू से ही अछूता रहा है। इसके दो कारण हैं। पहला यह कि अधिकांश ज्‍योतिषी जातक की कुण्‍डली देखने में अधिक सहज महसूस करते हैं। कारण स्‍पष्‍ट है कि पैसा तो वही देगा। ऐसे में समष्टि की बजाय व्‍यक्तिगत काम अधिक हो रहा है। दूसरा कारण है कि बड़े पैमाने पर सोचने और उस पर फलादेश देना अपेक्षाकृत कठिन भी है। इसके लिए कहीं दिशा-निर्देश नहीं मिलते। ऐसे में मुण्‍डेन ज्‍योतिष का उपेक्षित होना स्‍वाभाविक है। मेरे आदरणीय गुरुओं में से एक ने मुझे बताया कि अगर मुण्‍डेन पर काम करना है तो पहले राफेल पढ़ो। मैंने खुब खोजा लेकिन राफेल की किताब कहीं नहीं मिली। स्‍थानीय पुस्‍तक विक्रेता ने भी उसे उपलब्‍ध कराने से मना कर दिया। लेकिन पिछले दिनों वह मुझे ऑनलाइन कहीं मिल गई। अब मैं यहां उसका हिन्‍दी अनुवाद दे रहा हूं। इससे हो सकता है कि ज्‍योतिष के कई विद्यार्थियों को लाभ मिल जाए। मुझे तो खैर दोहरा लाभ पहले से ही हो रहा है। पहला कि इस किताब को और अधिक ध्‍यान से पढ़ पाउंगा और दूसरा कि मेरे ब्‍लॉग के लिए एक और पोस्‍ट मिल जाएगी। अब मैं इसी पोस्‍ट में राफेल की किताब के अंश देना शुरू कर रहा हूं।



राफेल की पुस्‍तक का पहला भाग

क्‍या है मुण्‍डेन ज्‍योतिष
वास्‍तव में यह ज्‍योतिष की एक शाखा है जो देशों, राज्‍यों और शहरों का भाग्‍य बताती है। एक सामान्‍य कुण्‍डली की तरह किसी स्‍थान विशेष की कुण्‍डली बनाई जाती है। किसी राष्‍ट्र के सम्‍बन्‍ध में बात करते समय कारकों का वर्गीकरण निम्‍न अनुसार होगा।
प्रथम भाव - यह आम आदमी से सम्‍बन्धित होगा। जनता का स्‍वास्‍थ्‍य, राष्‍ट्र की सामान्‍य परिस्थितियां और सामान्‍य तौर पर देश की गृह विभाग की स्थिति।
द्वितीय भाव- राष्‍ट्रीय एक्‍सचेंजर, रेवेन्‍यू, स्‍टॉक मार्केट, बैंकें, व्‍यावसायिक मामले और ट्रेडिंग इस भाव से देखी जाएगी।
तृतीय भाव- रेलवे और इससे सम्‍बन्धित अन्‍य मुद्दे, ट्रेफिक, स्‍टॉक एवं शेयर, टेलिग्राफ, टेलिफोन एवं पोस्‍टल मुद्दे, यातायात के साधन, मोटरें, बसें, किताबें, समाचारपत्र और साहित्यिक गतिविधियां इस भाव से देखी जाएंगी।
चतुर्थ भाव- मौसम, कृषि, फसलें और जमीन सम्‍बन्‍धी मुद्दे, खानें, सार्वजनिक इमारतें। इसके अलावा देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी इस भाव से देखेंगे।
पंचम भाव- थियेटर, म्‍युजिक हॉल और मनोरंजन के स्‍थान, बच्‍चे, शिक्षा, जन्‍मदर, स्‍कूलें, नैतिक मूल्‍य और सट्टा प्रवृत्ति इस भाव से देखी जाएगी।
छठा भाव- बीमारी, जनता का स्‍वास्‍थ्‍य, थल और जल  सेना, आराधना के तरीके और सामान्‍य तौर पर कामकाजी जनता को इससे देखा जाएगा।
सातवां भाव- विदेशी मामले और अन्‍य ताकतों के साथ सम्‍बन्‍ध, युद्ध व अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के विवाद, शादियां, तलाक और विदेशी व्‍यापार इससे देखा जाएगा।
आठवां भाव- मृत्‍युदर, आत्‍महत्‍याएं और गुप्‍त समूहों को इससे देखा जाएगा।
नौंवा भाव- अदालतें, जज, पंडित, इमाम, पादरी और हुजूरी के अलावा कॉलोनियल ट्रेड अफेयर, व्‍यावसायिक ताकतें, विज्ञान, शिपिंग और इससे जुड़े अन्‍य मामले इस भाव से देखे जाएंगे।
दसवां भाव- राजा, शाहीपन, सरकारें, सत्‍ताधारी ताकतें, एरिस्‍टोक्रेसी, नोबेलिटी व समाज इस भाव से देखे जाएंगे।
ग्‍यारहवां भाव- संसद, राज्‍यसभा, लेजिस्‍लेशन इस भाव से देखेंगे।
बारहवां भाव- कैदी, वर्कशॉप या गोदियां, अस्‍पताल, दानदाता ट्रस्‍ट, अपराध, हत्‍याएं, अपराधी, जासूस और गुप्‍त शत्रु इस भाव से देखने होंगे।

यह तो हुआ भावों के कारकों का उल्‍लेख। अब इनके इस्‍तेमाल के तरीके आगामी पोस्‍टों में बताने का प्रयास करूंगा। अभी इतना ही यह था भाग एक...