रविवार, अक्टूबर 05, 2025
ज्योतिष कक्षा: पहला दिन - ज्योतिष और कर्म
ज्योतिष की जरूरत क्यों ?
(यह सवाल मैंने खुद ने खड़ा किया। ताकि विद्यार्थियों को स्पष्ट हो सके कि जिस विषय को पढ़ना है उसे क्यों पढ़ा जा रहा है।)
इसके लिए मैंने अपने ही एक पुराने विचार का सहारा लिया। जिस पर मैं इसी ब्लॉग पर एक लेख भी ठेल चुका हूं। स्वंतत्रता की संभावना शीर्षक से अपने निजी विचारों वाले ब्लॉग में इस पर चर्चा कर चुका हूं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस पर कभी लेख प्रस्तुत नहीं कर पाया। कक्षा में कही मेरी बात कुछ इस तरह थी...
“यह सृष्टि ईश्वर की बनाई है। चाहे कपिल मुनि के सांख्य दर्शन की बात करें या शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत की। हमें ईश्वरवादी धर्म एक बात स्पष्ट कर देते हैं कि जो कुछ हो रहा है वह ईश्वर द्वारा तय है। सबकुछ पूर्व नियत है। कोई घटना या मनुष्य के दिमाग में उपजा विचार तक ईश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित किया गया है। सृष्टि का एक भाग बनकर हम केवल उसे जी रहे हैं।
ऐसे में इच्छा स्वातंत्रय (freedom of will) की कितनी संभावना शेष रह जाती है, यह सोचने का विषय है। क्योंकि या तो सबकुछ पूर्व नियत हो सकता है या हमारे कर्म से बदलाव किया जा सकता है। अगर कर्म से पत्ता भी हिलाया जा सकता है, जो ईश्वर की इच्छा नहीं है तो सबकुछ परिवर्तित किया जा सकता है। यह कर्म आधारित सिद्धांत बन जाएगा। यानि जैसा कर्म करेंगे वैसा भोगेंगे।
तो कुछ भी पूर्व नियत नहीं रह जाता है। इस बात का यह अर्थ हुआ कि ज्योतिष भी समाप्त हो जाएगी। अब ग्रह नक्षत्रों के बजाय यह देखना होगा कि जातक ने अब तक क्या कर्म किए हैं। कुछ प्रश्न फिर अनुत्तरित रह जाते हैं कि जातक की पैदा होने की तिथि, परस्थिति, माता-पिता, परिजन आदि उसका खुद का चुनाव नहीं हैं, ना ही अन्य परिस्थितियों का चुनाव वह कर पाता है। इसका जवाब फिर से प्रारब्ध में आ जुड़ता है।
अगर सबकुछ पूर्व नियत है तो हमें कुछ भी करने की जरूरत ही नहीं है या जो कर रहे हैं उसका पुण्य और पाप भी हमारा नहीं बल्कि सृष्टिकर्ता का ही हुआ और अगर कुछ भी पूर्व नियत नहीं है तो बिना चुनाव के हमें मिले जीवन के खेल के पत्तों का सवाल अनुत्तरित रह जाता है।
अब तीसरी स्थिति सामने आती है कि ईश्वर ने कुछ पूर्व में ही नियत कर रखा है और कुछ इच्छा स्वातंत्रय की संभावना शेष रखी है। यहां यह स्पष्ट नहीं है कि हमें कितनी स्वतंत्रता मिली हुई है।”
बात दृढ़ और अदृढ़ कर्मों की
कक्षा में एक छात्र ने कहा कि हमें कर्मों का फल भी तो भुगतना है। इस पर मैंने ज्योतिष मार्तण्ड प्रोफेसर के.एस. कृष्णामूर्ति को ज्यों का त्यों कोट कर दिया। उन्होंने अपनी पुस्तक फण्डामेंटल प्रिंसीपल ऑफ एस्ट्रोलॉजी में स्पष्ट किया है कि कर्म तीन प्रकार के होते हैं। पहला प्रकार है दृढ़ कर्म। ये ऐसे कार्य है तो तीव्र मनोवेगों के साथ किए जाते हैं। चाहे चोरी हो या हत्या। पूर्व जन्म के इन कर्मों का फल भी तीव्रता से मिलता है। दूसरा है अदृढ़ कर्म। इस प्रकार के कर्मों के प्रति व्यक्ति सचेत नहीं होता है, लेकिन कर्म तो होता ही है। जैसे अनचाहे किसी का नुकसान कर देना अथवा दिल दुखा देना। ऐसे कर्मों का फल हल्का होता है। तीसरा प्रकार है दृढ- अदृढ़ कर्म। ये कार्य तीव्र अथवा हल्के मनोभावों से किए जा सकते हैं, लेकिन इनकी परिणीति से इतर भावों के स्तर पर कर्मों का फल मिलता है।
इन तीन अवस्थाओं के साथ चौथी स्थिति मैंने अपनी तरफ से जोड़ी निष्काम कर्म की। कर्मयोग में बताया गया है कि अगर हम किसी भी कार्य को बिना आसक्ति के भाव से करते हैं तो वे कर्म बंधन पैदा नहीं करते। कर्मयोग की ऊंची अवस्थाओं में ही व्यक्ति ऐसे कर्म कर पाता है। ऐसे जातक जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर कैवल्य या मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं।
कल बात करेंगे ज्योतिष की कक्षा के दूसरे दिन की... हालांकि कक्षा शुरू हुए तीन दिन हो चुके हैं लेकिन पोस्ट लिखने में कुछ अधिक समय लग रहा है। ऐसे में किन्हीं दो दिनों को मैं एक साथ पेश कर दूंगा, ताकि आगे नियमितता बनी रह सके।
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
ज्योतिष कक्षा:4था दिन - राशियों का परिचय - मेष, वृष व मिथुन राशि
आकाश को बारह बराबर हिस्सों में बांटकर बारह राशियां बना दी गई हैं। पहली राशि मेष, दूसरी वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और बारहवीं मीन राशि है। हर राशि का अपना स्वभाव है। आज की कक्षा में हम केवल तीन राशियों का परिचय प्राप्त करेंगे।
अगली कक्षा में हम बात करेंगे कर्क, सिंह और कन्या राशि की...
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
ज्योतिष कक्षा : 7वां दिन - तुला और वृश्चिक राशि
ज्योतिष की कक्षा में आज हम बात करेंगे शुक्र के आधिपत्य वाली दूसरी राशि तुला और मंगल के आधिपत्य वाली दूसरी राशि वृश्चिक की। इनमें से एक राशि शुक्र के आधिपत्य की है तो दूसरी मंगल के आधिपत्य की। आइए देखते हैं कैसे होते हैं ये लोग...
वणिक बुद्धि वाले तुला राशि के जातक
तुला राशि के जातकों की मनोदशा का केवल यही वर्णन नहीं है। भारतीय जनतंत्र में आज जिस व्यक्ति की छाप सबसे बड़ी है वह तुला राशि का ही जातक था। मैं बात कर रहा हूं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की। बाजार में अपनी तुला लिए खड़े व्यक्ति के रूप में तुला राशि को दिखाया गया है। विचारों से सम और हर बात को पूरी तरह तौलकर देखने वाला जातक तुला राशि का होगा। हालांकि इस राशि पर शुक्र का आधिपत्य है, इस कारण तुला राशि के जातकों को बनने संवरने, संगीत, चित्रकारी और बागवानी जैसे शौक होते हैं। इसके बावजूद रचनात्मक आलोचना और राजनैतिक चातुर्य इन जातकों का ऐसा कौशल होता है कि दूसरे लोग इनसे चकित रहते हैं। वणिक बुद्धि के कारण वाद विवाद में पड़ने के बजाय समझौता करने में अधिक यकीन रखते हैं। इन जातकों का शरीर दुबला पतला और अच्छे गठन वाला होता है। चेहरा सुंदर भी न हो तो मुस्कान मोहक होती है। इन जातकों को विपरीत योनि वाले सहज आकर्षित करते हैं। हालांकि इन जातकों की शारीरिक संरचना सुदृढ़ होती है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण बीमारियों की पकड़ में जल्दी आते हैं। साझीदार के साथ व्यापार करना इनके लिए ठीक रहता है। जातक उचित समय पर सही सलाह देता है। ऐसे में साझेदार भी ज्यादातर फायदे में रहते हैं। एक बार मित्र बना लें तो हमेशा के लिए अच्छे मित्र सिद्ध होते हैं। इन जातकों का पंचमेश शनि होता है। इस कारण तुला लग्न के जातकों के अव्वल तो संतान कम होती है और अधिक हो भी जाए तो संतान का सुख कम ही मिलता है। इनके लिए शुभ दिन रविवार और सोमवार बताए गए हैं। शुभ रंग नारंगी, श्वेत और लाल तथा शुभ अंक एक व दस हैं।
हताश होना नहीं सीखा वृश्चिक ने
वृश्चिक राशि के जातकों की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि वे कभी हार नहीं मानते। एक बार जिस काम में जुट गए उससे जल्दी से उकताते नहीं है और आखिरी दम तक उस काम को पूरा करने में जुटे रहते हैं। वृश्चिक राशि के लोग दो तरह के होते हैं। एक जो अपनी इंद्रियों को जीतकर जितेन्द्रिय बन जाते हैं। और दूसरे निम्न कोटि के जो ईर्ष्यालु और असभ्य होते हैं। इस राशि पर मंगल का आधिपत्य है सो अच्छा खासा डील डौल और चौड़ा माथा होता है। बालों में स्वाभाविक रुप से घुंघरालापन होता है। दवाओं से जुड़े कामों में अच्छा लाभ कमा सकते हैं। जलतत्वीय राशि होने के कारण इन लोगों का अंतर्ज्ञान भी ठीक होता है। बात दैहिक सुख की हो या गुप्त साहसिक कार्यों की, ये लोग पूर्ण संतुष्टि के साथ जिंदगी जीना पसंद करते हैं। मंगल के कारण आई उत्तेजना, अधिकार, उग्रता और द्ढृता इन लोगों को जिंदगी के कई क्षेत्रों में सफल बनाती है। ये अच्छे नौकर सिद्ध होते हैं, जब तक कि मालिक इनके साथ ईमानदार रहे। एक बार इन्हें नीचा दिखा दिया जाए या धोखा दे दिया जाए तो क्रूरता की हद तक जाकर बदला लेते हैं। कठोर वाणी से शत्रु बनाते हैं। अगर वृश्चिक राशि वाले लोग बोलना सीख लें तो अपने पीछे फॉलोअर्स की अच्छी संख्या एकत्रित कर सकते हैं। अधिकार की अति भावना के कारण ये चाहते हैं कि परिवार में भी बिना किसी लॉजिक या सवाल जवाब के इनकी बात सुन ली जाए और उस पर अमल हो। घर में कलह का यह सबसे बड़ा कारण बनता है, वरना इन लोगों को शांत और सहज पारिवारिक वातावरण पसंद है। स्त्रियों में वृश्चिक लग्न के मामले में तो केएस कृष्णामूर्ति ने यहां तक कहा है कि वृश्चिक लग्न की स्त्री हो और लग्न व मंगल अशुभ पीडि़त हो तो ऐसी औरत से विवाह करना अभिशाप है। वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए रविवार, सोमवार, मंगलवार और गुरुवार सफलता देने वाले हैं। पीला, लाल, नारंगी और क्रीम रंग शुभ है।
अगली कक्षा में हम बात करेंगे धनु और मकर राशियों की...
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
ज्योतिषीय उपचार में रत्नों की भूमिका
किसी के भाग्य में सुधार या दुर्भाग्य से बचाने में रत्नों की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इतिहास की पुस्तकों में बताया गया है कि मोहनजोदड़ो और कालीबंगा की खुदाई के दौरान वहां भारी संख्या में गोमेद पाए गए। किसी प्राचीन सभ्यता में इस प्रकार के रत्नों की उपस्थिति पुरातत्ववेत्ताओं के लिए भी कम आश्चर्य का कारण नहीं रही होगी। अपने समय के महानगर रहे इन दो प्राचीन शहरों में इस प्रकार के रत्न मिलने का अब तक कोई ऐतिहासिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश ज्योतिष संबंधी पुस्तकें यह बताती हैं कि गोमेद राहू के उपचार के लिए है।
प्राचीन काल के इस सूत्र से आगे बढ़ें तो देखते हैं कि एक तरफ रंगों के रूप में मुगलकाल में रंगीन कांचों का उपयोग हुआ तो दूसरी ओर गणित से फलित की ओर झुक रही ज्योतिष में रत्नों की भूमिका बढ़ती गई। प्राचीन शास्त्रों में ग्रहों के रुष्ट हो जाने अथवा विपरीत प्रभाव देने की स्थिति में दान और शांति के उपायों का वर्णन है, बाद में रत्नों के जरिए उपाय किए जाने लगे। इन रत्नों का इस्तेमाल कब और कैसे किए जाए, इस बारे में कई तरह की अवधारणाएं हैं।
अपेक्षाकृत पुरानी पद्धतियां जहां लग्नेश और भाग्येश से संबंधित रत्नों को पहनाने और मारक व बाधकास्थानाधिकपति से संबंधित रत्नों से परहेज रखने की सलाह देती है, वहीं लाल किताब और सुनहरी किताब जैसी पद्धतियां वर्षफल कुण्डली और ग्रहों के शुभत्व के लाभ को ध्यान में रखते हुए रत्न पहनने की सलाह देने लगी। इसी के साथ के शरीर के छूने, उनके पहनने के स्थान, विशिष्ट अंगुलियों और वजन तक को लेकर कई तरह के विश्लेषण आए हैं। दूसरी ओर रत्न परीक्षण का काम भी तेजी से बढ़ा है।
हर ग्रह से विशेष तरह का रत्न जुड़ा हुआ है। केतू से लहसुनिया, शुक्र से हीरा, सूर्य से माणिक्य, चंद्रमा से मोती, मंगल से मूंगा, राहू से गोमेद, गुरु से पुखराज, शनि से नीलम और बुध से पन्ना। यह प्रमुख रत्न हैं। इसके बाद इनके उपरत्न भी बाजार में आए हैं जो मूल रत्नों की तुलना में बहुत सस्ते हैं। सभी धारणाओं के इतर यह स्पष्ट है कि रत्न हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। आप जानिए पाराशर से अपने शुभ रत्न के बारे में... इसके लिए अगस्त माह में केवल 500 रुपए फीस लगेगी। पाराशर समूह रत्न बेचने के काम से नहीं जुड़ा है, यहां केवल आपके लिए शुभ रत्न के बारे में जानकारी दी जाएगी और उसका आपके जीवन में प्रभाव बताया जाएगा।
श्री गणेश आपका दिन मंगलमय करे...
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
गुरुवार, मार्च 11, 2010
लाल किताब का प्रभाव यानि सिद्धांतों में घालमेल
लाल किताब के प्राचीन नहीं होने से इसकी महत्ता कम नहीं हो जाती। वर्तमान दौर में उपायों के लिए अगर कोई पुस्तक मदद करती है तो वह है लाल किताब, इसके अलावा पटियाला और चंडीगढ़ के कुछ लोगों ने, अगर सही कहूं तो एक युवा ज्योतिषी ने सुनहरी किताब भी प्रकाशित की। वह युवा बहुत कम उम्र में ही दुनिया छोड़ गया लेकिन जो सुनहरी किताब लिखकर गया है, वह लाल किताब को भी पीछे छोड़ती है,
लेकिन अभी बात उपचारों की
आप किसी भी पुराने ग्रंथ को उठाकर देख लीजिए। उसमें ग्रहों की गड़बड़ पर शांति के उपचार बताए गए हैं। दान, भेंट, पूजा, यज्ञ अथवा मंत्रोच्चार से समस्याओं का समाधान पाया जा सकता है। फौरी तौर पर चंद्र राशियों के आधार पर ग्रहों के रत्नों की जानकारी भी कहीं-कहीं मिल जाती है, लेकिन वह भी ग्रह शांति उपचारों से ही संबंधित है।
उपचारों का बिंदू आने के साथ ही मेरे दिमाग में सबसे पहले लाल किताब आती है। इसके दो कारण हैं। पहला कि इस किताब में उपचारों की इतनी लम्बी रेंज दी गई है कि एक उपचार नहीं कर सको तो दूसरा कर लो, दूसरा नहीं तो तीसरा, इसी तर्ज पर लिखी गई सुनहरी किताब तो उपचारों की पूरी लिस्ट ही थमा देती है। अपनी इच्छा के अनुसार उपचार चुनो और कर लो। दूसरा कारण है कि मेरे गुरूजी ने मुझे बताया कि लाल किताब के उपचार तांत्रिक विधियों पर आधारित है। जातक जैनुइन है तो उसे लाल किताब का ही उपचार बताओ, जातक की जितनी अधिक आस्था होगी, उपचार उतनी ही तेजी से काम करेगा।
वर्तमान दौर में लोगों को प्रसव पीड़ा भोगने की बजाय लोगों को सिजेरियन ऑपरेशन अधिक सहज लगता है। इसलिए उन्हें वही दो, जो वे मांगते हैं। यह बात मुझे शुरूआती दौर में ही महसूस होने लगी थी। किसी को कोई उपचार बताओ और कहो कि पांच साल बाद सबकुछ दुरुस्त हो जाएगा तो, या तो वह ज्योतिषी को दिमागी रूप से दिवालिया समझेगा, वरना अपनी समस्याओं की लिस्ट बताकर तात्कालिक स्थितियों से तत्काल छुटकारा दिलाने की गुहार लगाएगा।
रत्नों की सीरीज में यह लाल किताब कहां घुस गई
हां, अभी तो रत्नों पर लगातार लिख रहा हूं, इस बीच यह लाल किताब कहां से घुस आई। जैसा कि मैंने अपने पुराने लेखों में लिखा है ज्योतिष की एक विधा में दूसरी विधा का घालमेल इतनी आसानी से होता है कि दोनों विधाओं के लिंक मिले जुले नजर आने लगते हैं। रत्नों से उपचार में एक ओर जहां हस्तरेखा शास्त्र घुसा हुआ है वहीं दूसरी ओर लाल किताब भी घुस चुकी है। लाल किताब का सूत्र है कि जो ग्रह किसी स्थान पर बैठकर खराब फल दे रहा हो उसे वहां से हटाकर दूसरी जगह पहुंचा दो। यह इतना आसान है, गुरू जैसे बड़े ग्रह को बिना उसके बारह चंद्रमा को छेड़े उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया जाता है। यह ऐसे ही नहीं हो जाता है। इसके लिए कुछ नियम हैं। उसकी बात बाद में...
लाल किताब के अनुसार जिस ग्रह से संबंधित वस्तुओं को
- प्रथम भाव में पहुंचाना हो उसे गले में पहनिए
- दूसरे भाव में पहुंचाने के लिए मंदिर में रखिए
- तीसरे भाव में पहुंचाने के लिए संबंधित वस्तु को हाथ में धारण करें
- चौथे भाव में पहुंचाने के लिए पानी में बहाएं
- पांचवे भाव के लिए स्कूल में पहुंचाएं,
- छठे भाव में पहुंचाने के लिए कुएं में डालें
- सातवें भाव के लिए धरती में दबाएं
- आठवें भाव के लिए श्मशान में दबाएं
- नौंवे भाव के लिए मंदिर में दें
- दसवें भाव के लिए पिता या सरकारी भवन को दें
- ग्यारहवें भाव का उपाय नहीं
और बारहवें भाव के लिए ग्रह से संबंधित चीजें छत पर रखें।
हां, तो यह हुआ लाल किताब का हिसाब किताब।
अब बात मेरे एक अनुभव की। मैं एक जातक को परम्परागत पंडितजी के पास लेकर गया। उन्हें कुण्डली दिखाई। जातक कन्या लग्न का था। पंडितजी ने कहा चंद्रमा खराब है, इसे मोती पहनाना पड़ेगा। मैंने कहा ठीक है मैं अंगूठी बनवाने के लिए बोल देता हूं, तो पंडितजी ने मना कर दिया। कहां कि कन्या लग्न के जातक को लॉकेट में ही चंद्रमा बनवाकर पहनना होगा। क्यों... पंडितजी से पूछा नहीं...
मैं बताता हूं इसका कारण
लाल किताब के अनुसार चंद्रमा की अंगूठी बनाकर पहनने से चंद्रमा चला जाएगा तीसरे घर में, यानि वृश्चिक राशि में, इससे चंद्रमा नीच का हो जाएगा। अब एक तरफ लाल किताब राशियों को मानती ही नहीं है। वह हर कुण्डली को मेष लग्न की कुण्डली मानती है और हर घर को तयशुदा राशियां दे रखी हैं। ऐसे में परम्परागत ज्योतिष और लाल किताब का घालमेल रत्न को पहनने में एक और बाधा बन गया। परम्परागत ज्योतिष ने तो बस इतना कहा कि चंद्रमा के उपचार के लिए मोती पहनाना चाहिए, लेकिन लाल किताब बता रही है कि हाथ में नहीं गले में पहनो...
अब जिन लोगों ने मेरे पिछले लेख पढ़े हैं वे समझ रहे होंगे कि रत्न केवल टच करने या किरणों से ही उपचार नहीं करते बल्कि कैसे पहने हैं इससे भी फर्क पड़ता है। तो इस तरह किसी एक रत्न को पहनने के लिए मेरे पास तीन अलग-अलग आधार हो गए, जो कभी भी किसी भी स्थिति में एक-दूसरे का निषेध कर सकते हैं। कब और कैसे करेंगे यह तय नहीं है।
अगली पोस्ट में मैं चर्चा करूंगा कि इन सब बाधाओं के बावजूद रत्न क्यों पहनाया जाता है, क्या इसे पहनाए बिना काम नहीं चल सकता...
इंतजार कीजिए अगली कड़ी का...
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
मंगलवार, अप्रैल 21, 2009
क्या हो ज्योतिषी की भूमिका ?
यह सवाल कमोबेश हर ज्योतिष सीखने वाले विद्यार्थी के समक्ष आती है। कभी अध्ययन की शुरूआत में तो कभी अध्ययन के दौरान तो कभी ज्योतिष से उकता जाने के बाद। बहुत से लोग ज्योतिष सीखना शुरू करते हैं। कुछेक फलादेश देते हैं और इसके बाद इस विषय को इसी कारण छोड़ देते हैं कि वे अपनी भूमिका तय नहीं कर पाते हैं। हालांकि बाजार में कुछ ऐसे ज्योतिषी भी हैं जो कमोबेश तांत्रिक की भूमिका निबाहते हैं। मैंने उनके मुंह से अपने जातक को यह तक कहते सुना है आप कहें तो आपके विरोधी का पेशाब बंद कर दूं। आप कहें तो सोते को खड़ा कर दूं। कुछ इसी तरह के जोश दिला देने वाले वाक्य सुनकर जातक हैरान रह जाता है। विरोधी का कुछ हो न हो जातक का पेशाब तो बंद हो ही जाता है। वह उपचार करने और फीस देने के लिए तैयार नजर आने लगता है। कई चक्कर निकालने के बाद भले ही जातक का मोहभंग हो जाए लेकिन एक समय के लिए तो वह जैसे ज्योतिषी का अनुयायी बन जाता है। ज्योतिषी को कोई फर्क नहीं पड़ता कि एक जातक छूटे या बंधा रहे, क्योंकि उसके पास तो पूरी कतार होती है मूर्ख बनने वालों की। प्रोफेशनली ज्योतिष का व्यवसाय करने के दौरान मेरे सामने यह सवाल आया था कि क्या है ज्योतिषी की भूमिका और कहां तक वह जातक की जिन्दगी में दखल कर सकता है। वह कैसे उपचार बता सकता है जो उसकी जिन्दगी में सुधार लाए या सोते को खड़ा कर दे। मैंने कालान्तर में कई वरिष्ठ ज्योतिषियों और अपने साथियों से बात भी की। कुछ लोगों के दिमाग में स्पष्ट धारणा थी तो कई ने वैसे ही जवाब दिए जो वे अपने जातकों को देते थे। वास्तव में अधिकांश ज्योतिषी यह नहीं जानते कि उनकी भूमिका क्या है। जैसे एक चिकित्सक के पास जाते हैं और उसे रोग बताते हैं तो वह उपचार लिखकर दे देता है। अब रोगी पर निर्भर करता है कि वह कितनी गंभीरता से दवाएं लेता है, परहेज रखता है और बीमार करने वाली परिस्थितियों से दूर रहता है। चिकित्सक रोगी का रोग खुद नहीं ले सकता है। इसके उलट जो ज्योतिषी एक तरह से दावा करते हैं कि वे जातक का दुख दूर कर देंगे हो सका तो उनका दुख भी खुद ले लेंगे। यह मुझे इस परा विद्या के मामले में अतिरेक लगता है। हालांकि कई ज्योतिषियों ने यह तो बताया है कि एक आदर्श ज्योतिषी कैसा होना चाहिए, उसकी कुण्डली में क्या योग होने चाहिए या साइकोलॉजिकली वह कितना स्ट्रांग होना चाहिए। लेकिन ज्योतिषी और जातक के इंटरएक्शन में ज्योतिषी की क्या भूमिका होनी चाहिए इस पर अधिक नहीं दिया गया है। जैसा कि मुझे लगता है प्राचीन भारतीय मान्यता की तुलना में फलित ज्योतिष अपेक्षाकृत नया विषय है। ऐसे में ज्योतिषी की भूमिका के लिए नया प्रोटोकॉल ज्योतिषियों को ही बनाना पड़ेगा। वैसे एक जगह दक्षिण के प्रसिद्ध ज्योतिषी के.एस. कृष्णामूर्ति ने एक जगह स्पष्ट किया है कि ज्योतिषी की क्या भूमिका हो सकती है। वे बताते हैं कि गहरी झील में नाव खे रहा जातक जब थक जाता है तो पास से गुजरता हुआ ज्योतिषी उसे यह संकेत दे सकता है कि कहां पानी उथला है और कितनी देर तक और उसे नाव खेनी पड़ेगी। यह बहुत स्थूल उदाहरण हुआ लेकिन इससे बहुत कुछ संकेत मिल जाते हैं। मेरा प्रबुद्ध ज्योतिषियों से आग्रह है कि वे इस विषय पर अपने विचार पेश करें…… यथा
संगीता पुरी जी ने कहा ….
…जहां तक मेरा मानना है कि एक ज्योतिषी को मानवतावादी होना चाहिए….कोई व्यक्ति उसके पास खुद की परेशानी लेकर आता है…..उसे मनोवैज्ञानिक तौर पर सम्बल प्रदान करना एक ज्योतिषी का काम है…..पर वह ऐसा न करे कि उसके विरोधियों की तकलीफ बढ जाए….वैसे तो एक ज्योतिषी के हाथ में यह सब होता ही नही ….हम जातको के सम्मुख सिर्फ लाल और हरी बत्ती दिखा सकते हैं…..हमारा काम लोगों को यह समझाना है कि उसे अपने कर्तब्यों का फल पूर्ण तौर पर कब से मिलने लगेगा।
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.