‘‘एक ज्योतिषी अपने शिष्यों को ज्योतिष का पाठ पढ़ा रहा था। इसी दौरान उसके पास एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आता है और बताता है कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर जा चुकी है। ठीक उसी समय ज्योतिषी की पत्नी कमरे में आती है और बताती है कि कुएं से पानी निकालने के दौरान रस्सी टूट गई और बाल्टी कुएं में जा गिरी है। ज्योतिषी अपने शिष्यों से पूछते हैं कि व्यक्ति के सवाल और अभी मिले संकेत से क्या अर्थ लगाए जा सकते हैं। इस पर सभी शिष्य एक मत थे कि दोनों का संबंध बनाने वाली रस्सी के टूट जाने का अर्थ है कि जातक की पत्नी लौटकर नहीं आएगी। ज्योतिष गुरु मुस्कुराए। उन्होंने कहा नहीं, ऐसा नहीं है। हकीकत में पानी से पानी को अलग करने वाला तत्व (रस्सी) समाप्त हो गया है। ऐसे में पानी फिर से पानी में जा मिला है। इससे संकेत मिलता है कि जातक की पत्नी शीघ्र लौट आएगी। ज्योतिषी ने जातक से कहा कि वह घर जाए, उसकी पत्नी शीघ्र लौटने वाली है। उसी दिन शाम तक जातक की पत्नी लौट आई।’’
रविवार, अक्टूबर 05, 2025
Oman : A strong tool for Astrological prediction
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
शनिवार, अप्रैल 30, 2011
ज्ञान है, अंतर्ज्ञान है, पर अनुभव की परिपक्वता?
इसमें पहला तो है विषय का पुख्ता ज्ञान। एक नैसर्गिक ज्योतिषी जब ग्रहों, राशियों, भावों, इनके संबंधों और इनके जातक की जिंदगी के प्रभाव के बारे में पढ़ता है तो वह स्पष्ट रूप से इन्हें अलग-अलग समझ पाता है कि इनके जातक की जीवन और आपस में क्या संबंध हैं और परिणाम कैसे आ रहे हैं। शुरूआती दौर में कुण्डलियों का विश्लेषण उपलब्ध किताबी या श्रव्य ज्ञान को और धार देता है। बाद में हर ज्योतिषी अपने स्तर पर पुख्ता नियम बना लेता है। बाद में यही नियम फलादेश करने में उसकी सहायता करते हैं। जो लोग पैदाइशी या ईश्वरीय कृपा के साथ ज्योतिषी नहीं होते हैं उन्हें ग्रहों, राशियों और भावों का चक्कर उलझन में डाल देता है। मैंने ऐसे सैकड़ों उदाहरण देखे हैं।
दूसरा है ईश्वर प्रदत्त अंतर्ज्ञान - यह किसी भी ज्योतिषी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिन्दू है। एक ज्योतिषी केवल अपने चेतन मस्तिष्क की गणनाओं से फलादेश नहीं कर सकता। इसके दो कारण है। पहला गणनाओं का विशाल होना और दूसरा देश-काल और परिस्थितियों के लगातार बदलते रहने से इंटरप्रटेशन में बदलाव आना। इसके चलते ज्योतिषी केवल फौरी गणनाओं के भरोसे ही फलादेश नहीं कर पाता है। यहां अंतर्ज्ञान ज्योतिषी की मदद करता है। कई लोग अनुमान, कल्पना और अंतर्ज्ञान में भेद नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वे ऊट-पटांग फलादेश करते जाते हैं। बाद में पता चलता है कि कोई भी फलादेश सटीक नहीं पड़ रहा है। ऐसे कुछ नौसिखिए ज्योतिषी ज्योतिष की पुस्तकों तो कुछ अपने गुरुओं को गालियां निकालकर बरी हो जाते हैं।
तीसरा है अनुभव - जैसा कि मैं ऊपर स्पष्ट कर चुका हूं कि ज्योतिष में इंटरप्रटेशन का बहुत महत्व है। ऐसे में काउंसलिंग के दौरान ज्योतिषी का अनुभव बहुत मायने रखता है। मेरा मानना है कि आधुनिक ज्योतिषियों को वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश प्रचलित ज्ञान के बारे में जानकारी होनी चाहिए। अब संचार माध्यमों से यह सहज सुलभ भी है और भारत जैसे स्वतंत्र राष्ट्र में हर तरह की पुस्तक हर जगह उपलब्ध है। ऐसे में अपने ज्ञान के दायरे को बढ़ाते जाने से ज्योतिषी की धार भी मजबूत होती जाएगी। इसके बावजूद भी जीवन जीने से आ रहा अनुभव भी मायने रखता है। जिस ज्योतिषी की शादी नहीं हुई है वह किसी जातक के विवाह संबंध में आधारित प्रश्नों के किताबों में लिखे जवाब तो दे देगा, लेकिन उसका इंटरप्रटेशन इतना कमजोर होगा कि जातक तक सही संदेश पहुंचना संदेह के दायरे में ही रहेगा।
चौथा है खुद ज्योतिषी के योग - इस बारे में केएस कृष्णामूर्ति ने लिखा है कि ज्योतिषी दो तरह के होते हैं। एक गणित में होशियार तो दूसरे फलादेश में होशियार। भले ही गणित में होशियार ज्योतिषी को अधिक ज्ञान हो, लेकिन प्रसिद्धि फलादेश करने वाले ज्योतिषी को ही मिलेगी। ऐसे में किसी ज्योतिषी की कुण्डली में यह भी देखने की जरूरत है कि उसके भाग्य में प्रसिद्ध होना लिखा है कि नहीं। अगर प्रसिद्धि नहीं लिखी है तो लाख बेहतर फलादेश करने के बाद भी दुनिया उसे जानेगी नहीं।
नौसिखिए ज्योतिषियों के चुटकुले

- एक जातक ने ज्योतिषी को कुण्डली दिखाई। उस समय वह 22 साल का था। ज्योतिषी ने कुण्डली देखते ही कहा कि तुम्हारी कुण्डली का कारक ग्रह तो गुरु है। और गुरु की दशा से पहले तुम्हारे 55 साल की उम्र में मारक योग बन रहा है। ऐसे में तुम्हारी जिंदगी में भी अच्छा समय आएगा ही नहीं। तुम्हारी तो जिंदगी ही व्यर्थ है। अच्छे चेहरे-मोहरे और दोस्तों से घिरा रहने वाला वह जातक इतना डिप्रेशन में आ गया कि अगले दो महीने तक अपने कमरे से भी बाहर नहीं निकला।
- एक जातक को ज्योतिषी ने उपचार बताया कि आप तो शनि मंदिर में तेल का दीया जलाओ। हालांकि जातक के नाम से ही स्पष्ट था कि वह मुसलमान था, लेकिन ज्योतिषी ने तो जैसे फाइनल घोषणा ही कर दी कि शनि मंदिर में दीया जलाने से ही उपचार होगा, नहीं तो नहीं होगा। अब एक मुसलमान की आस्था उस मंदिर से जुड़ी ही नहीं है तो उपचार नहीं होना भी तय है, लेकिन किताब में ऐसा ही लिखा था, सो जातक को बता दिया गया
- बच्चा गुम होने के सवाल का जवाब खोज रहे ज्योतिषी ने किताब में पढ़कर बताया कि बच्चा अभी पांच फर्लांग की दूरी पर है। सवाल पूछने आए सज्जन ने पूछा कि पांच फर्लांग कितना होता है, तो ज्योतिषी ने स्पष्ट कह दिया कि किसी गणित के मास्टर से पूछ लेना। खैर, बाद में बच्चा करीब पैंतीस किलोमीटर दूर एक गांव में पकड़ा गया। ज्योतिषी ने यह नहीं समझा कि करीब अस्सी साल पहले लिखी गई किताब में पांच फर्लांग की दूरी तय करने में लगने वाला समय उतना ही हो सकता है जितना आज के दौर में बस में बैठकर पैंतीस किलोमीटर दूर पहुंचना। आखिर ज्योतिष गणना है तो समय की ही गणना।
- एक जातक से ज्योतिषी ने कहा कि तुम्हारी पत्नी का जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हुआ है। ऐसे में पति और पत्नी की हमेशा लड़ाई रहेगी। जातक ने कहा लड़ाई तो नहीं होती। ज्योतिषी को प्वाइंट जीतना था, तो उसने कहा कि सास-बहू की खिच-खिच से घर में तनाव रहता होगा। अब जातक पकड़ में आ गया। वह ज्योतिषी की बात को लेकर इतना सीरियस हुआ कि कुछ दिन में घर में सचमुच लड़ाई रहने लगी और बाद में तो जातक के तलाक की खबर भी सुनी।
- एक जातक की कुण्डली के विश्लेषण से ज्योतिषी को पता चला कि अगर जातक ने हाथी की सवारी की तो उसे नुकसान हो सकता है। आव देखा न ताव ज्योतिषी ने निर्णय सुनाया कि आप कभी हाथी की सवारी मत करना, वरना दुर्घटना का शिकार हो सकते हो। गरीब जातक हंसा और कुण्डली लेकर चला गया।
- एक नए ज्योतिषी ने अपनी कुण्डली 'बड़े' ज्योतिषी को दिखाई। उन्होंने शनि मुद्रिका पहनने की सलाह दी। एक महीने में नए ज्योतिषी का समय सुधर गया और वह काम धंधे पर लग गया। नया ज्योतिषी इतना उत्साहित हुआ कि अपने साथ काम कर रहे अधिकांश लोगों की कुण्डली देखकर शनि मुद्रिका ही पहना दी। यह सोचकर कि मेरा भला हुआ है तो दूसरों का भी हो जाएगा।
इसके अलावा चांदी की अंगूठी में या गले के लॉकेट में मोती पहनाना, गायों को गुड़ डालना, बच्चें का लिंग निर्धारण, मृत्यु की तारीख बताना, भाग्योदय की दिशा (?) बताना, लॉटरी या मटके में निकलने वाला नम्बर बताना, नाम में बदलाव के सुझाव, जातक के परिवार के अन्य लोगों के लिए उपाय बताकर जातक को फायदा पहुंचाने जैसे उपचार भी नौसिखिए ज्योतिषी बताते रहते हैं। यहां तक कि सुने सुनाए किस्सों के आधार पर ज्योतिष के उपायों में तांत्रिक उपचारों का समावेश भी इन सालों में बहुत बढ़ गया है। इसमें लाल और काली किताब का बड़ा रोल है। इन ऊट-पटांग निर्णयों और क्रियान्वयन का पता भी बहुत बाद में लगता है, तब तक पुल के नीचे से बहुत सा पानी बह चुका होता है....
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
शनिवार, अप्रैल 25, 2009
नेता और ज्योतिषी- यूं पत्थर बन गया भगवान
यह किस्सा भी महाराज से जुड़ा है। चुनाव के दिनों में महाराज बहुत बिजी रहते हैं। पिछले आठ महीने से तो उन्हें सांस खाने की भी फुरसत नहीं मिल रही है। पहले विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनाव।
यह किस्सा पिछले विधानसभा चुनाव का है। यानि जब वसुंधरा की सरकार बनी थी तब का। उन दिनों राम की पार्टी वाले कई नेताओं को राहू का भय सता रहा था। सो महाराज को मिला एसी का टिकट। जयपुर की किसी फार्म हाउस में उनके रहने की पुख्ता व्यवस्था कर दी गई थी। महाराज की सेवा सुबह एक नेता आता, दोपहर को दूसरा और रात को तीसरा। कई दिनों से यही क्रम चल रहा था। रिसोर्ट पर महाराज रोजाना नेताओं की शक्ल देखकर बोर होने लगे। तो एक दिन अपने कुछ चेलों को वहीं बुला लिया। एक दिन महाराज अपने चेलों के साथ बैठे थे कि एक चेले ने पूछ लिया कि महाराज भगवान कहां है। महाराज तरंग में थे, सवाल पर नाड़ खिंच गई, बोले बेटा वो सामने छोटा सा पत्थर पड़ा है ना उसमें भगवान है। चेला हंसा तो महाराज तन गए बोले 'हंस मत, अभी घण्टेभर में इसकी पूजा कराके बताउंगा।'
थोड़ी देर में एक नेताजी आए। आते ही उनकी कुण्डली देखी और बोले मंगल का भीषण कोप है। आपको एक तांत्रिक क्रिया करनी होगी तभी शांति होगी। आप तुरंत एक पत्थर लेकर आओ। नेताजी को पसीना आ गया। उन्होंने अपने चेले को बोला पत्थर लाओ। चेला लपका कि महाराज ने टोका कि नहीं आप खुद लेकर आओ। इलाज आपका करना है तो पत्थर भी आपको ही लाना पड़ेगा। गोल-मटोल नेताजी सोफे पर से मुश्किल से उठे। थोड़ी सहायता महाराज ने कर दी। बोले वो सामने जो पत्थर पड़ा है उसे ही ले आओ। नेताजी तुरंत लपके और पत्थर उठा लाए। अब महाराज ने उन्हें एक लाल रंग का धागा दिया और कहा इसे पत्थर के चारों ओर लपेट दो। नेताजी लगे लपेटने। पूरा धागा पत्थर पर लपेट दिया तो उसकी आकृति गोल हो गई। महाराज ने पूजन की विधि बता दी और पत्थर को पूजाघर में रखने को कह दिया। नेताजी खुशी-खुशी पत्थर को लेकर अपने घर चले गए। महाराज ने गर्व से चेले की ओर देखा। चेला नतमस्तक, लेकिन सवाल भी दागा कि महाराज नेताजी इस पत्थर की पूजा करेंगे क्या।
महाराज ने कहा चलकर देख लेंगे। दो दिन बाद महाराज अपने चेलों को लेकर नेताजी के घर पहुंच गए। नेताजी भी प्रसन्न हुए सीधे अपने मंदिर में ले गए और बताया कि दो दिन से वे मंत्र जप रहे हैं और अब गोटियां भी ठीक फिट हो रही हैं।
चुनाव के बाद नेताजी जीत गए और शायद अब भी वह पत्थर नेताजी के पूजागृह की शोभा बढ़ा रहा होगा। सालों से सुनता और पढ़ता आ रहा हूं कि कण-कण में भगवान है लेकिन महाराज ने इसे सिद्ध करके बता दिया था।
अगली बार चुनाव और पॉलिटिकल बाबा का किस्सा।
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.