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रविवार, अक्टूबर 05, 2025

ज्‍योतिष कक्षा : 8वां दिन धनु और मकर

ज्‍योतिष की कक्षा में अब तक हम सात कक्षाओं में मेष से लेकर वृश्चिक राशियों से परिचय प्राप्‍त कर चुके हैं। आज धनु और मकर राशि से परिचय करेंगे। धनु और मीन जहां गुरु के आधिपत्‍य की राशियां हैं वहीं मकर और कुंभ शनि के आधिपत्‍य की। आइए देखते हैं क्‍या बताती हैं ये राशियां...

विपरीत परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन : धनु राशि

धनु राशि के जातकों के बारे में बताने से पहले अगर मैं आपको बता दूं कि युवाओं के पथ प्रदर्शक स्‍वामी विवेकान्‍द धनु लग्‍न के जातक थे, तो आपके दिमाग में धनु लग्‍न अथवा धनु राशि से प्रभावित जातकों की छवि तुरंत बन जाएगी। धनु राशि का स्‍वामी गुरु है। इन जातकों की खासियत यह होती है कि ये विपरीत परिस्थिति में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। ये जातक बहुत अधिक सोचते हैं। इस कारण निर्णय करने में देरी भी करते हैं, लेकिन एक बार जिस निर्णय पर पहुंच जाए उससे डिगते नहीं हैं। सत्‍य के साथ रहते हैं और किसी के साथ अन्‍याय हो रहा हो तो उसके साथ जा खड़े होते हैं। बोलने में इतने मुंहफट होते हैं कि यह जाने बिना कि सामने वाले पर क्‍या बीत रही होगी, बोलते जाते हैं। इन लोगों की बोली में ही व्‍यंग्‍य समाया हुआ होता है। सीधी बात कहने की बजाय टोंटिंग में ही बोलते नजर आएंगे। अच्‍छे चेहरे मोहरे, सुगठित शरीर, लम्‍बा चौड़ा ललाट, ऊंची और घनी भौंहों वाले आकर्षक व्‍यक्तित्‍व को देखकर ही समझा जा सकता है कि यह धनु लग्‍न या धनु राशि प्रधान व्‍यक्ति है। ये निडर, साहसी, महत्‍वाकांक्षी, अति लोभी और आक्रामक होते हैं। इन लोगों को जिंदगी में अनायास लाभ नहीं होता है। ये रिश्‍तेदारों के प्रति निर्मम और अपरिचितों के लिए नम्र होते हैं। ये तेजी से मित्र बनाते हैं और लम्‍बे समय तक उसे निभाते भी हैं। अगर किसी व्‍यक्ति की धनु राशि या धनु लग्‍न की कन्‍या से विवाह हो तो उसे भाग्‍यशाली समझना चाहिए। क्‍योंकि ऐसी कन्‍या अपने पति को समझने वाली और सही परामर्श देने वाली होती है। इनके लिए शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार बताए गए हैं। शुभ रंग श्‍वेत, क्रीम, हरा, नारंगी और हल्‍का नीला बताया गया है। शुभ अंक छह, पांच, तीन और आठ हैं।

सतत कर्म, सहनशील, स्थिर प्रवृत्ति : मकर राशि

लम्‍बे और पतले मकर लग्‍न अथवा राशि के जातकों को एक बारगी देखने पर यकीन नहीं होता कि ये लोग बड़े समूह या संगठन का सफल संचालन कर रहे हैं। बचपन में इन्‍हें देखें तो लगता है पता नहीं कब बड़े होंगे और कब अपने पैरों पर खड़े होंगे। पर, किशोरावस्‍था में अचानक तेजी से बढ़ते हैं और इतना विकास करते हैं कि अचानक युवा दिखाई देने लगते हैं। यह अवस्‍था भी इतने अधिक लम्‍बे समय तक रहती है कि साथ के युवक अधेड़ दिखने लगते हैं और इन पर जैसे अवस्‍था का असर ही दिखाई नहीं देता। यह त्‍याग और बलिदान की राशि है। कृष्‍णामूर्ति बताते हैं कि जो व्‍यक्ति पिछले जन्‍म में अपना बलिदान देता है वह इस जन्‍म में मकर राशि में पैदा होता है। ये जातक मितव्‍ययी, नीतिज्ञ, विवेक बुद्धियुक्‍त, विचारशील, व्‍यावहारिक बुद्धि वाले होते हैं। इनमें विशिष्‍ट संगठन क्षमता होती है। असाधारण सहनशीलता, धैर्य और स्थिर प्रवृत्ति इन्‍हें बड़ा संगठन खड़ा करने में मदद करती है। इन लोगों को उपहास से हमेशा भय लगा रहता है। इस कारण समूह में बोल नहीं पाते। ऐसे में लोग समझते हैं कि ये लोग अंतर्मुखी हैं। इस राशि का स्‍वामी शनि है। शनि अच्‍छा होने पर ये लोग ईमानदार, सजग और विश्‍वसनीय होते हैं और शनि खराब होने पर ठीक उल्‍टा होता है। इन्‍हें एक साथी हमेशा साथ में चाहिए। तब इनका कार्य अधिक उत्‍तम होता है। इन जातकों में अहंकार, निराशावाद, अत्‍यधिक परिश्रम की कमियां होती हैं। इन्‍हें चिंतन पक्षाघात (एनालिसिस पैरालिसिस) की समस्‍या होती है। जातकों को सजग रहकर इन समस्‍याओं से बचने की कोशिश करनी चाहिए। ये लोग अपने परिजनों से प्रेम करते हैं लेकिन उसका प्रदर्शन नहीं करते। इसलिए परिवार के लोग, यहां तक कि इनकी संतान भी ही समझती है कि उनके पिता उन पर ध्‍यान नहीं देते। एक बात है जो इनके व्‍यवहार के विपरीत होती है वह यह कि जहां समूह में एक भी बाहर का व्‍यक्ति हो तो ये लोग चुप्‍पी मार जाते हैं, लेकिन यदि परिवार के लोग या सभी निकट के परिचित लोग हो तों परिहास की हल्‍की फुल्‍की ऐसी बातें करते हैं कि सभा में उपस्थित सभी लोगों का हंसते हंसते बुरा हाल हो जाता है। इनके लिए शुभ दिन शुक्रवार, मंगलवार और शनिवार होता है। शुभ रंग लाल, नीला और सफेद है।

 

नौंवी कक्षा में हम कुंभ और मीन राशियों का परिचय प्राप्‍त करेंगे। इसके बाद ग्रहों और भावों पर चर्चा की जाएगी।

ज्‍योतिष कक्षा : 9वां दिन, कुंभ व मीन राशि

ज्‍योतिष की कक्षा में हम अब तक मेष से मकर राशि तक के बारे में जान चुके हैं। आज हम भचक्र की आखिरी दो राशियों के बारे में जानकारी हासिल करेंगे। इनमें से एक राशि शनि की है तो  दूसरी गुरु की। मजे की बात यह है कि इन दोनों राशियों वाले जातक दिखने में लंबे होते हैं। कुंभ राशि वाला जातक खुद लंबा नहीं होगा तो कम से कम अपने पिता से अधिक लंबा होता है। अब तक मेरे देखे गए नब्‍बे प्रतिशत मामलों में ऐसा ही हुआ है। कुंभ नकारात्‍मक होने के बावजूद एक सफल शख्सियत देती है तो मीन राशि के जातक आमतौर पर हमें शांति से क्रियाशील बने हुए दिखाई देते हैं।

कुंभ - मजबूत शरीर और शक्तिशाली दिमाग

भचक्र ही यह ग्‍यारहवीं राशि है। इस पर शनि का आधिपत्‍य है। वायु तत्‍वीय, विषम और स्थिर राशि है। इस राशि में कोई भी ग्रह उच्‍च या नीच का नहीं होता। इस लग्‍न के जातक आमतौर लंबे, दुबले, क्रियाशील, नकारात्‍मक सोच वाले, काम में लगे रहने वाले और मजबूत शरीर वाले होते हैं। ये दिमागी रूप से इतने सजग होते हैं कि इन्‍हें प्रशंसा अथवा अन्‍य चापलूसी वाले तरीकों से खुश किया या बरगलाया नहीं जा सकता। इसी प्रवृत्ति के कारण ये लोग नई बातों को समझने और आत्‍मसात करने के मामले में कुछ कमजोर होते हैं, इसके चलते कुंभ राशि के जातकों पर बहुत जल्‍दी पुरातनपंथी होने का ठप्‍पा लग जाता है। अपनी तय नियमों और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं, इस कारण सामाजिक स्‍तर पर कई बार बहिष्‍कार की स्थिति तक पहुंच जाते हैं। केएस कृष्‍णामूर्ति तो कहते हैं कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में कुंभ राशि के जातक काम के प्रति झुके हुए होते हैं, यहां काम का अर्थ उन्‍होंने अभिलाषा से लगाया है। ऐसे जातक अगर अकेले में या बिना मित्रों के रहेंगे तो खराब स्थिति में रहेंगे। भले ही सावधानी से मित्रों का चुनाव करे, लेकिन मित्र जरूर रखें। कुंभ राशि अथवा लग्‍न वाली स्त्रियां अपने साथी को संतोषजनक पाने पर उनका पूरा साथ देती हैं, लेकिन असंतुष्‍ट होने पर अपने पति को छोड़ देने के लिए भी हिचकिचाती नहीं हैं। कुंभ जातकों के लिए गुरु, शुक्र, मंगल और सोमवार श्रेष्‍ठ बताए गए हैं। शुभ रंग पीला, लाल, सफेद और क्रीम है।

मीन - करुणामयी सहारा देने वाली

यह गुरु की दूसरी और भचक्र की अंतिम राशि है। इस राशि के जातकों में करुणा की भावना होती है, स्‍वयं बढ़कर भले ही सहायता न करे, लेकिन पुकारे जाने पर पूरी तरह सहायता के लिए तत्‍पर हो उठते हैं। ये दार्शनिक होते हैं, रोमांटिक जीवन जीते हैं, साहस के साथ स्‍पष्‍ट बोलने वाले और विचारशील होते हैं। अपनी सज्‍जनता के कारण जिंदगी में सफलताओं के कई मौके गंवा बैठते हैं। द्विस्‍वभाव राशि का असर जातकों के विचारों पर भी पड़ता है, एक समय इनके एक प्रकार के विचार होते हैं तो परिस्थितियां बदलने पर विचार भी बदल जाते हैं। मीन जातकों को प्राय: गैस संबंधी शिकायत होती है। मदिरा के सेवन के शौक को मीन राशि वाले जातकों को नियंत्रण में रखना चाहिए। ये लोग आमतौर पर भण्‍डारी, शिक्षक, मुनीम अथवा बैंक में कर्मचारी होते हैं। एकाग्रता कम होने के कारण निरन्‍तर नए कार्यों की ओर उन्‍मुख होते रहते हैं। अपनी संतान के आश्रित बनने से बचने क लिए ये जातक युवावस्‍था में ही निवेशों पर ध्‍यान देने लगते हैं। मीन लग्‍न के जातक अपेक्षाकृत तेजी से मित्र बनाते हैं, ऐसे में इनके मित्रों में हर तरह के लोग शामिल होते हैं। इन जातकों को हमेशा ध्‍यान रखना चाहिए कि अपने सभी भेद मित्रों के सामने नहीं खोलें, अन्‍यथा परेशानी में फंस सकते हैं। मीन राशि के लिए गुरु, मंगल और रविवार श्रेष्‍ठ दिन हैं। लाल, पीला, गुलाबी और नारंगी रंग शुभदायी हैं। एक, चार, तीन और नौ अंक शुभ हैं।

 

यहां तक हमने जाना राशियों के बारे में। अब हम आगामी कक्षाओं में हम बात करेंगे भावों की। भावों के साथ उनका कारकत्‍व भी जुड़ा है। हर भाव के साथ कारकत्‍व की जांच हम गहनता से करेंगे।

भगवान गणेश आपका दिन मंगलमय करे...