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रविवार, अक्टूबर 05, 2025

फेंग शुई के चमत्‍कारी खिलौने

फेंग शुई´ का शाब्दिक अर्थ `वायु-जल´ है। इस पद्धति में वातावरण का सन्तुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे आस-पास ऊर्जा का अनन्त स्त्रोत है। यह ऊर्जा सकारात्मक या नकारात्मक होती है। फेंग शुई पद्धति नकारात्मक ऊर्जा को खत्म या कम करती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है। इससे बाधाएं खत्म होती हैं और हमें सुख-शान्ति की प्राप्ति होती है। इस पद्धति में इस्तेमाल होने वाले छोटे-छोटे यन्त्र आदि वास्तु दोषों का हल निकाल देते हैं। फेंगशुई पद्धति में संवेदनाओं को पैदा करने वाले सहायक उपकरणों के बारे में विस्‍तार से बताया गया है। आप जो देखते, सुनते और महसूस करते हैं, उससे आपकी दिनचर्या पर भारी असर पड़ता है। ऐसे में मनमोहक सुगंध वाली अगरबत्तियों, खूबसूरत दृश्‍यों और बेहतरीन धुनों का इस्‍तेमाल करने की सलाहें दी जाती हैं। अच्‍छा वातावरण हमारे लिए अच्‍छा भाग्‍य लाने वाला सिद्ध होता है और इससे विपरीत स्थितियां हमें खराब स्थितियों में ले जाती हैं।

पवन घंटियां - स्वास्थ्य की मजबूती के लिए घर के प्रवेश द्वार पर बाइंड चाइम्स लगाएं। इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। छह छड़ों वाली पवनघंटी लगाने का सबसे अच्‍छा स्‍थान उत्‍तरी पश्चिमी कोना है। पांच या सात छड़ों वाली पवनघंटी का इस्‍तेमाल भी किया जाता है। पांच छड़ें दुर्भाग्‍य को मोड़ देती हैं।

बैम्‍बू स्टिक – घर में समृद्धि लेकर आता है। -बेम्बू प्लांट युवा रहने का प्रतीक है, क्योंकि यह सदाबहार होता है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं आता। यह पेड़ हर मौसम में हमेशा सीधा खड़ा रहता है। और आंधी तूफान में भी यह हमें दृढ़ निश्चय के साथ खड़े रहना सिखाता है। यह विश्वास और स्थायित्व का प्रतीक है।

गोल्‍डफिश – छोटे मछलीघर या फिश बाऊल में घर में म‍छलियां रखना शुभ माना गया है। इसमें कुल नौ म‍छलियां होती हैं। इनमें से आठ सुनहरे या लाल रंग की होनी चाहिए और एक काले रंग की। किसी एक मछली के मर जाने पर नई मछली लाइए। सुनहरी मछली के मर जाने पर माना जाता है कि वह अपने साथ आपका दुर्भाग्‍य ले गई है। मछलीघर रखने का सबसे अच्‍छा स्‍थान दीवानखाना है। जीवित म‍छलियां नहीं लगा सकते, तो उसकी जगह नीले पानी में अटखेलियां करती डॉल्फिन का उपयोग किया जा सकता है।

घंटियां और चीनी सिक्‍के – घर के दरवाजे के हैण्‍डल में सिक्‍के लटकाने से घर में संपत्ति आती है। तीन पुराने चीनी सिक्‍कों को लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांधकर लटकाया जा सकता है। सिक्‍के घर के अंदर की ओर लटकाने चाहिए। दरवाजे के बाहर वाले हैण्‍डल पर अगर छोटी घंटी भी लटकाई जाए तो यह सौभाग्‍य को घर में लाता है।

हंसता बुद्ध – लाफिंग बुद्धा या हंसते हुए बुद्ध की मूर्ति को संपन्‍नता, सफलता और सौभाग्‍य लाने वाला माना जाता है। इसे मुख्‍य द्वारा के सामने करीब तीस फीट की ऊंचाई पर लगाने का प्रावधान है। यहां मूर्ति घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा का अभिनन्‍दन करती है। अगर ठीक सामने संभव न हो तो इसे कुछ किनारे पर भी रखा जा सकता है।

तीन टांग वाला मेंढक – मुंह में सिक्‍का लिए हुए तीन टांग वाले मेंढ़क को धनदायक माना जाता है। इसे घर के भीतर मुख्‍य द्वार के पास रखा जाता है, जैसे इसने अभी अभी धन लेकर घर में प्रवेश किया हो।

स्‍फटिक के गोले – फेंग शुई के मुताबिक घर का दक्षिणी पश्चिमी कोना प्रेम, रोमांस और स्‍नेह से संबंधित होता है। इस क्षेत्र की ताकत को बढ़ाने के लिए यहां स्फटिक के दो गोले रखे जाते हैं। अगर ये गोले बैठकखाने में हैं तो ये परिवार के स्‍नेह संबंधों में बढ़ोतरी करने वाले सिद्ध होते हैं। यह नकारात्‍मकता को सोख लेते हैं। ऐसे में सप्‍ताह में एक बार इन्‍हें नमक के पानी में रखकर इनका शोधन करना चाहिए। ताकि ये सक्रिय रहें। दक्षिण पश्चिम कोने में स्‍फटिक का झाड़ फानूस भी लगाया जा सकता है।

प्रेम परिंदे – दंपत्ति में प्रेम और रोमांस के साथ निष्‍ठा का भाव बढ़ाने के लिए प्रेमी परिंदों के जोड़े श्रेष्‍ठ है। घर के दक्षिण पश्चिम में बतखों, तोता-मैना अथवा ऐसे ही जोड़ों की तस्‍वीरें लगाकर आप जीवन में प्रेम भाव को बढ़ा सकते हैं।

फुक-लुक और साउ – चीन के हर घर में तीन देवताओं की मूर्तियां दिखाई देंगी। फुक समृद्धि, लुक उच्‍च श्रेणी और साउ दीर्घायु देते हैं। इन देवताओं की पूजा नहीं की जाती, ये प्रतीकात्‍मक रूप से घरों में रखे जाते हैं। इनकी उपस्थिति ही भाग्‍य को बढ़ाने वाली होती है।

हिमालय का प्रभाव

भारतीय वास्‍तु और चाइनीज फेंग शुई में सकारात्‍मक और नकारात्‍मक ऊर्जा की दिशा को लेकर कुछ भिन्‍नताएं हैं। इसका प्रमुख कारण हिमालय नजर आता है। मंगोलिया और अन्‍य उत्‍तरी क्षेत्रों से आने वाली सर्द हवाओं को रोककर हिमालय ने भारत के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया। इससे न केवल नदियों का पानी मिल रहा है, बल्कि सर्दी का असर भी बहुत हद तक कम रहता है। ऐसे में उत्‍तरी और पूर्वी दिशाओं को भारत में शुभ माना जाना नैसर्गिक ही दिखाई देता है। दूसरी तरफ चीन के दक्षिण और पश्चिम में हिमालय उन्‍हें इतना अधिक देता है कि वहां इन्‍हीं दिशाओं को शुभ मान लिया गया है। ऐसे में भारतीय वास्‍तु और चाइनीज फेंगशुई में दिशाओं को लेकर भेद बना हुआ है। दिशाओं को छोड़कर ऊर्जा की बात करें तो हम इन चाइनीज खिलौनों से अपनी भाग्‍यवृद्धि का मार्ग प्रशस्‍त कर सकते हैं।

यह लेख पिछले दिनों राजस्‍थान पत्रिका में छपा था। उसका लिंक

http://epaper.patrika.com/18466/Rajasthan-Patrika-Bikaner/05-12-2011#page/10/2

रविवार, नवंबर 20, 2011

आपके घर में ऊर्जा का प्रवाह

किसी भी स्‍थान विशेष का वास्‍तु देखने का मूल अर्थ यह है कि वह स्‍थान किसी व्‍यक्ति अथवा संस्‍था के लिए कितना उपयुक्‍त अथवा अनुपयुक्‍त है। वास्‍तु के नियम भी कमोबेश इसी आधार पर बताए गए हैं। किसी घर में वास्‍तु के अनुरूप निर्माण या वस्‍तुओं को किसी स्‍थान विशेष पर रखना अथवा किसी दफ्तर निर्माण में मूल रूप से अंतर होता है। अगर देवताओं के आधार पर देखें तो यह कुछ कठिन प्रतीत होता है, लेकिन अगर इसी वास्‍तु निर्माण को हम ऊर्जा के स्‍तर पर देखें तो आप खुद भी अपने घर के सही वास्‍तु का अनुमान कर सकते हैं।

वास्‍तु में मूल रूप से तीन बातों का ध्‍यान रखा जाता है। इसमें हवा, पानी और रोशनी शामिल हैं। इन तीनों का बहाव अगर सही हो तो उस घर को वास्‍तु के दृष्टिकोण से उपयुक्‍त कहा जा सकता है। अन्‍य देशों की तुलना में भारत की भौगोलिक स्थिति और मौसम चक्र विशिष्‍ट है। उत्तर की ओर हिमालय, उत्‍तर पश्चिम में रेगिस्‍तान, दक्षिण में समुद्र और पूर्व में पहाडि़यों और समुद्र का मिश्रण। एक ओर हिमालय ठण्‍डे प्रदेशों से आ रही सर्द हवाओं को रोकता है तो अरब की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएं प्रकृति ने केवल भारतीय उपमहाद्वीप के लिए ही बनाई हैं। आप भारत के किसी भी कोने में जाएं इन विशेषताओं का लाभ आपको जरूर मिलेगा।

आपके घर का वास्‍तु

घर के वास्‍तु के निर्धारण के समय हमें दिशाओं के ऊर्जा स्‍तर को समझना होगा। वास्‍तु में उत्‍तर और पूर्व दिशा को अधिक ऊर्जा वाली दिशाएं बताया गया है। पूर्व में जहां तेज अधिक है वहीं उत्‍तर में गति अधिक है। उत्‍तर-पूर्व को दोनों का लाभ मिलता है। दक्षिण दिशा में तेजी कम लेकिन दाह यानि गर्मी अधिक है। दक्षिण पूर्व में तेज और दाह दोनों होने से यह शुद्ध स्‍थान बनता है। पश्चिम में रोशनी कम है और गति भी। ऐसे उत्‍तरी पश्चिमी कोना दक्षिणी पश्चिमी कोने की तुलना में अधिक ऊर्जा रखता है, लेकिन उत्‍तरी पूर्वी कोने की तुलना में कम। इसे आप हवा के बहाव, रोशनी के आगमन और जल के प्रवाह के रूप में भी देख सकते हैं।

उत्‍तर पूर्व बच्‍चों का कोना

ऊर्जा के इस प्रवाह को समझने के बाद हमें घर में ऊर्जा के प्रवाह के अनुसार ही सदस्‍यों रहने और क्रिया-कलापों के स्‍थान तय करने होंगे। घर का उत्‍तरी पूर्वी कोना अधिकतम ऊर्जा वाला स्‍थान है। यहां उन्‍हीं लोगों को रखा जा सकता है जो इस ऊर्जा के प्रवाह में सहज रह सकें। घर के बच्‍चे इस स्‍थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्‍त हैं। पूर्व और उत्‍तर से मिल रही सकारात्‍मक ऊर्जा उन्‍हें तेजी से विकसित करेगी। दक्षिण पूर्व में रसोई बनाने से हमें दक्षिण से मिल रहे दाह और पूर्व से मिल रहे तेज का लाभ होगा। इस स्‍थान पर चूल्‍हा हमेशा जलता रहेगा और स्‍वादिष्‍ट भोजन मिलेगा। दक्षिण पश्चिम में घर के बड़े बुजुर्ग रह सकते हैं। उनकी गति कम होती है और ऊर्जा का स्‍तर भी। वहां वे सहज रहेंगे। घर के उत्‍तरी पश्चिमी कोने में गृह मालिक को रखा जा सकता है, वे ऊर्जा और न्‍यायप्रियता के साथ काम कर सकेंगे। इसी तरह बिजली के उपकरणों को दक्षिण की दीवार पर और जल से संबंधित वस्‍तुओं को उत्‍तरी क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। यह ऊर्जा की प्रकृति के अनुकूल भी होगा।

ग्रह और उनकी ऊर्जा

वास्‍तु की संरचना में ग्रहों को वही स्‍थान दिए गए हैं जैसी उनकी ऊर्जा है। यह सकारात्‍मक या नकारात्‍मक हो सकती है। वास्‍तु का पूर्व सूर्य के पास है। यह तेजोमय है। उत्‍तर पूर्व पर गुरु का अधिकार है। यह सकारात्‍मक और तेज है। उत्‍तर पर बुध का अधिकार है। यह रचनात्‍मक और सक्रिय है। उत्‍तर पश्चिम पर चंद्रमा का अधिकार है। यह रचनात्‍मक लेकिन अधिक विचार करने वाला है। पश्चिम पर शनि का अधिकार है। यह नकारात्‍मक और धीमा है। दक्षिण पश्चिम पर राहू का अधिकार है। यह नकारात्‍मक और रहस्‍य समेटे हुए है। दक्षिण पर मंगल का राज है। यह उग्र और दाह देने वाला है। दक्षिण पश्चिम पर शुक्र का राज है। यह उष्‍ण और तेजयुक्‍त है। यह क्षेत्र की ऊर्जा के हिसाब से ही हम उसे काम में लें तो अधिकतम परिणाम हासिल होंगे।

सामान्‍य उपचार

  • कुछ सामान्‍य उपचार कर ऊर्जा के स्‍तर को संतुलित रखा जा सकता है। सिंह द्वार (घर का मुख्‍य दरवाजे) के आगे किसी प्रकार का अवरोध हो तो उसे हटा देना चाहिए, अथवा सिंह द्वार को वहां से हटा देना चाहिए।
  • दक्षिणी कोने में पानी का कम से कम उपयोग करें। वहां छोटा मंदिर बनाकर दीपक जलाकर रखें।
  • उत्‍तरी पश्चिमी कोने में पानी के बहने का साधन बनाए। बर्तन धोने का स्‍थान, वाशिंग मशीन या पेड़ पौधे लगाकर वहां निरंतर पानी गिराया जा सकता है। इससे परिवार में तनाव कम होगा।
  • उत्‍तरी और पूर्वी कोनों में दक्षिणी और पश्चिमी कोनों की अपेक्षा अधिक रोशनी का प्रबंध रखें।
  • घर में हवा का बहाव सुनिश्चित करने के लिए एक्‍जास्‍ट फैन लगाएं।
  • गंदा पानी शुक्र का परिचायक होता है। ऐसे में पूर्व मुखी घरों में घर के दाएं कोने से घर का गंदा पानी निकालने की सलाह दी गई है।
  • बाहर से भीतर की ओर शुद्ध जल का प्रवाह उत्‍तरी क्षेत्रों में हो तो बेहतर है।

चेतना को प्रभावित करता है कचरा

हम घर में मौजूद कचरे के प्रति उपेक्षा का भाव रखते हैं। इसके चलते हम इसके निस्‍तारण के बारे में भी गंभीरता से नहीं सोचते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कचरा धीरे-धीरे हमें मानसिक, आर्थिक और कई बार शारीरिक स्‍तर पर भी प्रभावित करने लगता है। वास्‍तु निमयों में कचरे का निस्‍तारण तेजी से करने के लिए कहा गया है। जिस मकान की छत पर कचरा जमा होता है, उस मकान के मालिक पर ऋण तेजी से चढ़ता है, इसी के साथ पैसा भी जगह जगह फंस जाता है। छत पर किसी भी सूरत में कचरे का जमाव नहीं होना चाहिए। यह आर्थिक भार से दबा देता है। कचरा जमा करने का दूसरा सबसे बड़ा स्‍थान है अंडरग्राउंड। जिस मकान के तहखाने में भारी मात्रा में कचरा जमा होता है वहां पारिवारिक तनाव तेजी से बढ़ता है। एक स्थिति यह आती है कि छोटी मोटी बातों पर भी बड़े झगड़े होने लगते हैं। अंडरग्राउंड के कचरे का निस्‍तारण भी तुरत फुरत करना चाहिए। इन दो प्रमुख स्‍थानों के अलावा घर में कई ऐसे कोने होते हैं जहां हमारी इच्‍छा के बगैर कचरा एकत्रित होता रहता है। मसलन कागज के टुकड़े, पुराने बैग, पुराने जूते, पुरानी चिठ्ठियां, मैग्‍जीन, ऐश ट्रे, बच्‍चों के टूटे हुए खिलौने, पुरानी बॉल्‍पेन, धातुओं के टुकड़े, अवधिपार दवाएं, पुराने और टूटे बर्तन, सूखे हुए पौधों जैसी हजारों छोटी छोटी चीजें घर में पड़ी रहती हैं और हम इनकी तरफ ध्‍यान भी नहीं दे पाते हैं। इस कचरे के निस्‍तारण से आप बहुत अधिक राहत महसूस कर सकते हैं। आपको इसी रविवार यह काम निपटा देना चाहिए।