आज अक्षय तृतीया है। इसे अबुझ मुहूर्त माना जाता है। यानि आज का पूरा दिन किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त है। बताया जाता है कि अक्षय तृतीय के दिन किए गए अच्छे और बुरे कामों का कभी क्षय नहीं होता इसी कारण इस दिन को अक्षय कहते हैं।
कर्मों का क्षय नहीं होने का तात्पर्य अलग अलग लगाया जाता है। एक अर्थ तो यह है कि आज के दिन किए गए कार्य इस जन्म और अगले जन्म में भी साथ रहते हैं और दूसरा अर्थ है कि इस दिन शुरू किया गया काम फलता फूलता रहता है खत्म नहीं होता।
तो आज के दिन अगर आप कोई काम शुरू करते हैं यानि बिजनेस, पढ़ाई या नौकरी शुरू करते हैं तो वह हमेशा बनी रहेगी। उसमें बाधाएं भी आएंगी तो ऐसी नहीं होगी कि काम को बंद करना पड़ जाए। ऐसी मान्यता है। इसी कारण राजस्थान के अधिकांश शहरों में इस दिन शादियां होती है। नए काम शुरू किए जाते हैं और लोग दान पुण्य करते हैं।
बीकानेर की स्थापना विक्रम संवत 1545 में राव बीका ने शनिवार के दिन यानि अक्षय तृतीया से एक दिन पहले की थी। इस कारण इसे अक्खा बीज या अक्षय द्वितीया भी कहते हैं। आज के दिन बीकानेर का हर घर छतों पर सिमट गया है। गृहणियां घरों में खीचड़ा और इमलाणी बना रही हैं। ताकि 42 डिग्री सेल्सियस तापमान में जब बच्चे और युवा जब पतंगबाजी कर रहे हों तो उन्हें लू नहीं लगे। लाउडस्पीकरों पर बोईकाट्या की आवाजें इतनी तेज हो चुकी हैं कि मैं ज्यादा देर कम्प्यूटर के पास बैठ नहीं पाउंगा। :)
मैं भी जा रहा हूं पुराने शहर के अपने घर में जहां पतंगों की बाढ़ आई हुई है। फोन आ रहे हैं मुझे निकलना होगा...
शाम तक दिमाग की हलचल में पोस्ट करूंगा पतंगबाजी की कुछ तस्वीरें।


very lively way of conveying facts old and new! thanx.
Kya bat hain...
Aap jese mahanubhav ki jarurat hain...is desh ki prachin dharoharo ko bachane ke liye..
bs aap ek chij pr dhyan or dijiye..ki aadmi ki kundlai ko kese parkha jaye chere ke dwara..
jese aapko parkha Bataiye ..
1-aap ki shani ki mahadasa chal rahi hain.
2- mangal ka lagan se sambhand.
3- Rahu ka karmchetra se sambhand.
4-Pita ke shuck me katoti...
5-karam chetra me ab tk 2-3 paribartan.
6-toda sa joot bolne ki aadat. kabhi-kabhi
Ab bataiye na ye sahi hain ya nahi.
वाह क्या बात है.. तो पतंग उडाई या नहीं? अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद..