निष्‍कपट सवाल और नालायक ज्‍योतिषी

ज्‍योतिष विद्यार्थी - सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi

आज क्षमा दिवस नहीं है 

मैं जानता हूं 
लेकिन फिर भी दिल में कुछ कचोट रहा है सो मेरे अजीज लोगों से माफी मांगने का दिल कर रहा है। 
पिछले दस महीने में सैकड़ों लोगों ने मुझे सवाल पूछे। कई महीने तो ऐसे बीते कि एक ही महीने में सवालों का आंकड़ा सौ को पार कर गया। इनमें से बहुत से लोग जानते हैं कि ज्‍योतिष दर्शन पर लिखने वाला यह जोशी बातें तो बड़ी-बड़ी करता है लेकिन सवालों के जवाब नहीं देता। कई लोगों ने पलटकर मेल भी लिखे। कईयों ने रिमाइण्‍डर लिखे। कुछेक ऐसे भी थे जिन्‍होंने ईमानदारी से मोटी मोटी गालियां दी। 

मैं यह शिकायत नहीं कर रहा बल्कि यह कहना चाह रहा हूं कि मैं इन लोगों की भावना को समझता हूं। जो व्‍यक्ति अपने दिल की गिरह खोल कर रख दे और मुझे मेल में ऐसी बातें लिखे जिसे वह अपने मां, पिता, पत्‍नी या पति से भी शेयर नहीं करे और पलटकर मेरा जवाब नहीं मिले तो ऐसी खीज स्‍वाभाविक है। 

मैं हृदय से उन सभी लोगों से माफी मांगता हूं जिन लोगों के सवालों के जवाब मैं अब तक नहीं दे पाया हूं। लेकिन कुछ  मुश्किलें मेरे साथ भी है। 

इनमें पहली है कि मैं एक फुल टाइम जर्नलिस्‍ट हूं। इसका मतलब हुआ कि सुबह ग्‍यारह बजे से रात दस बजे तक का टाइड शिड्यूल। यह थका देता है। जब नेट पर बैठता हूं। तो बीस से चालीस मेल रोज मेरा इंतजार कर रही होती है। इन्‍हें पढ़ना और कुछ का जवाब देना भी टेढ़ा काम है। थकान इस काम को दो से तीन घण्‍टे तक बढ़ा देती है। 

दूसरी समस्‍या: मेरी रुचि लोगों की कुण्‍डलियां देखने और उन्‍हें भविष्‍य बताने से अधिक ज्‍योतिष पढ़ने, दूसरे ज्‍योतिषियों से बात करने, नए बिंदुओं पर घण्‍टों सोचने, ज्‍योतिष से जुड़ी भ्रांतियों का कारण जानने और उनके जवाब ढ़ूंढने में अधिक है। इस कारण मैं किसी के सवालों का जवाब मेरे लेख में निकलता हो तो कोशिश करता हूं कि लेख लिख दूं। जवाब का जवाब हो जाएगा और मुझे एक अतिरिक्‍त लेख मिल जाएगा। 

तीसरी समस्‍या: जब प्रश्‍न बॉक्‍स मेरे ब्‍लॉग पर लगाया तो लगा कि इंटरनेट को दुनियाभर में देखा जाता है। इस कारण पूरी दुनिया से ऐसे सवाल मिलेंगे कि मुझे विषय पर अधिक पढ़ना और गुरुओं से अधिक चर्चा करने का अवसर मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चाहे देश के किसी भी कोने से हो या दुनिया के किसी भी शहर से समस्‍याएं एक जैसी हैं। किसी को अपनी बच्‍ची की शादी की फिक्र है तो किसी को अपने बच्‍चे के कैरियर की। किसी को प्रमोशन चाहिए तो कोई बिजनेस सेटअप करना चाहता है। यानि फिर से वही चक्र शुरू हो रहा है जिसे सालों पहले मैं छोड़कर आया था। 

चौथी समस्‍या: मैंने एक बार ईमानदारी से सवालों के जवाब देने शुरू भी किए। लेकिन पहले पंद्रह सवालों के जवाब दिए तो आठ में फेलियर नोटिस आया। यानि मेल भेजने वालों ने अपने ईमेल आईडी गलत भर दी थी। अब मैंने कई घण्‍टे लगाकर जो मेहनत की वह खराब हो गई। इस दुर्घटना ने मुझे बुरी तरह हतोत्‍साहित किया। बाद में मैंने उन्‍हीं मेल्‍स को जवाब दिया जो सीधे मेरे इनबॉक्‍स में आई। जो लोग मुझे मेल भेजते हैं उन्‍हें मेरी ईमेल आईडी पहले ही जवाब में मिल जाती है। ऐसे में लोग मुझे दोबारा मेल करते हैं। जो लोग गंभीर होते हैं। उनकी बात पहले सुनने की कोशिश करता हूं। कई लोगों को जवाब दिए और दिल में संतुष्टि है कि उन लोगों को संतुष्‍ट कर पाया। 

तो क्‍या किया जाए 

यह सवाल महत्‍वपूर्ण है। जो लोग मुझसे गंभीरता से सवाल पूछना चाहते हैं वे मेरी ईमेल आईडी लेकर उसी पर मेल करें। हां इंतजार जरूर करें क्‍योंकि मेरे पास इतना समय नहीं है कि में हाथों-हाथ कुण्‍डली बनाकर उसका विश्‍लेषण करूं और जवाब लिख भेजूं। जिन लोगों को मामला अधिक गंभीर लगता है और उन्‍हें लगता है कि पूछे बिना काम नहीं चलेगा। वे मुझे शनिवार के दिन सुबह कॉल कर सकते हैं। इस दिन मेरा व्‍हीकली ऑफ रहता है। लेकिन मेरी गुजारिश है कि बहुत जरूरी होने पर ही इस युक्ति को काम में लें। 

कुछ मेरे लिए भी 

विचारों की भूख ऐसी है कि खत्‍म नहीं होती। जब भी कोई सवाल हटकर आता है या फिर किसी भ्रांति से जुड़ा होता है तो मुझे लगता है कि सोचने और लिखने के लिए नया मसाला मिल गया है। आप अगर मुझे ऐसे विचार भेजेंगे तो मुझे लगेगा कि मेरे ब्‍लॉग पर पूर्व के लेख पढ़ने के बाद आपने मुझे रिटर्न गिफ्ट दिया है। :) 

8 विचार आए:

  1. sareetha said...

    सिद्धार्थ जी ,
    मेरा सुझाव है कि आप उन कुंडलियों का विश्लेषण कर पोस्ट तैयार करें । इससे आप्का काम भी आसान हो जाएगा । लोगों को प्रशनों के जवाब मिलेंगे और जिज्ञासुओं का ज्ञानवर्धन होगा । आखिर हम भी कुछ सीख पाएंगे और सात महीने से चला आ रहा इंतज़ार खत्म होगा ,अपने प्रशनों के जवाब पाने का ।

  2. अल्पना वर्मा said...

    माननीय आचार्य जी,
    एक प्रश्न बहुत दिनों से दिमाग में है.
    अगर किसी कारणवश किसी इमारत को बनाने से पहले नींव पूजन न होसके तो क्या करना चाहिये?
    भारत के अलावा कई पश्चिमी देशों में भूमि पूजन या नींव पूजन आदि नहीं कराये जाते तब भी वहां सब ठीक रहता है.
    आभार सहित.

  3. संगीता पुरी said...

    पाठकों को आपकी सुविधा के बारे में सोंचना ही चाहिए...आखिर क्‍यों और कितना झेलेंगे आप ?

  4. राज भाटिय़ा said...

    अरे बहुत आसान है, ९० % समस्याये तो घ्ररेलू ही होती है, या पेसो को ले कर, तो क्यो ना आप अपने पाठकॊ की समस्या को ले कर उन का नाम बदल कर एक लम्बा से लेख लिख दो, जिस से उन पाठको के सिवा भी अन्य पाढको को लाभ पहुचे ओर आप का काम भी आसान हो जाये.
    बाकी कुण्डली बगेरा का जो आप ने लिखा है, तो मेहनत करने सेपहले एक बार इ मेल चेक कर लो.
    भाई मेने भी आम समस्या को ले कर एक ब्लांग शुरु किया था, उस मे भी मुझे अजीब सी मेल आती थी, जिन्हे जब जबाब दो तो ए मेल ही गलत, ओर जब लेख लिखू तो अन्य लोगो की प्रतिकिर्या भी अजीब, लोगो का भल करना चाहा, लेकिन मेरा सत्या नाश होने लग गया, दिमाग का भुरता बन गया, सो मेने तो राम राम कर ली, इस लिये आप जो काम कर रहे है, यह इतना आसान नही, ओर इस मे अच्छी कम, बुराई ज्यादा है, ओर समय बहुत चाहिये.
    धन्यवाद

  5. अमित माथुर said...

    सिद्धार्थ जी को प्रणाम, सबसे पहले तो मैं आपसे निवेदन करूँ की आप ये प्रश्न पूछने और उसके उत्तर देने का सिलसिला ही अपने ब्लॉग से समाप्त कर दीजिये. आप ये मानकर चलिए की आप ज्योतिषी नहीं हैं ज्योतिष के विद्यार्थी और कहीं किसी हद तक ज्योतिष के अध्यापक हैं. कुण्डलिया बांचना ज्योतिष को व्यवसाय बनाने वाले ज्योतिषियो का कार्य है आपका नहीं. दूसरा ये की आप अपने लेख पूरी तरह अपने मन से लिखिए. ब्लोग्स का वास्तव में फंडा ही अपने मन की बात कहने और उस पर लोगो से प्रतिक्रियाए माँगना है. आजकल बहुत से ब्लोग्गेर्स ब्लॉग के ज़रिये समान बेच रहे हैं, अध्यापकी कर रहे हैं और कुछ एक ब्लोग्स तो वो भी कर रहे हैं जो उन्हें नहीं करना चाहिए. मेरा आपसे निवेदन है की आप अपने ब्लॉग को 'अपना ब्लॉग' रखिये. धन्यवाद -अमित माथुर

  6. अमित माथुर said...

    सिद्धार्थ जी मुझे बहुत उत्सुक्ता है, कृप्या इक्कीसिया गणेश के बारे मे कुछ बताइये.

  7. प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

    आप ये प्रश्न पूछने और उसके उत्तर देने का सिलसिला ही अपने ब्लॉग से समाप्त कर दीजिये!!!!!

  8. bajpairaghvendra said...

    pl give some more inforamtion about katway ji. and alos let us know which book has impressed you in field of astrology

ज्‍योतिष के लेखों में रुचि रखने वाले