आम समस्‍या – आम समाधान

ज्‍योतिष विद्यार्थी - sidharth

महिलाओं की दो समस्‍याएं ऐसी हैं जो आम है। पहली  खून की कमी व कमर दर्द और दूसरा छोटी चिंताएं जिन पर वे बहुत अधिक विचार करती हैं।

पहली समस्‍या मासिक धर्म से जुड़ी है। बहुत सी  महिलाएं इन समस्‍याओं के साथ ही जिंदगी बिता देती हैं तो कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो इन समस्‍याओं को मरते दम तक केन्‍द्र में रखती है जिससे उनकी खुद की जिन्‍दगी और परिवार भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। ज्‍योतिष गुरु के.एस. कृष्‍णामूर्ति ने मासिक धर्म की समस्‍याओं का समाधान सिंदूर में बताया है। केवल सिंदूर ही नहीं लाल चूडियां, लाल साड़ी, लाल अंत:वस्‍त्र, लाल बिंदिया और लाल लिपिस्टिक समस्‍या का समाधान कर सकते हैं। कैसे...

ज्‍योतिषी दृष्टिकोण से मासिक धर्म के दौरान मंगल का ह्रास होता है। इस मंगल की पूर्ति करने के लिए महिलाओं को लाल रंग का अधिक से अधिक इस्‍तेमाल उन्‍हें पुन: शक्ति प्राप्‍त करा सकता है। इसके अलावा स्‍त्री–पुरुष संबंध भी सुधारने में यह मदद करता है। मांगलिक स्त्रियों या ऐसी स्त्रियों जिनकी शादी मांगलिक पुरुष से हुई है, यह उपचार करें तो बेहतर है।

अब दूसरी समस्‍या यानि छोटी चिंताओं की

पहले मैं इसे गंभीरता से नहीं लेता था। क्‍योंकि मुझे यह स्‍त्री विशेष या कह दें पर्सनेलिटी विशेष की समस्‍या लगती थी। जो केवल स्‍त्री  ही नहीं किसी इंडी‍जुअल पुरुष में भी हो सकती थी। ज्‍योतिष अध्‍ययन के अनुसार  चिंता करने की समस्‍या के कारण स्त्रियों और पुरुषों में एक जैसे होते हैं। यानि  इसमें फर्क नहीं किया गया है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि पूर्व में जातक  हमेशा पुरुष ही रहे होंगे। ज्‍योतिष की पुस्‍तकें पढ़ने के दौरान ही एलन पीज की  पुस्‍तक हाथ लगी। इसमें स्त्रियों और पुरुषों के सोचने के तरीके के बारे में विस्‍तार से बताया गया था। तो मेरा भी ध्‍यान इस ओर गया। छोटी चिंताओं का स्‍वरूप क्‍या है और इसका एक साथ समाधान कैसे किया जा सकता है। ज्‍योतिष की ही पुस्‍तकों में इसका सपाट और सटीक उपाय बताया गया है। जिस तरह एक आदमी को सुखमय वैवाहिक और संबंध की दृष्टि से संतुष्टिदायक जिंदगी के लिए शुक्र की आवश्यकता होती है वैसे ही स्त्रियों के लिए इसे गुरु के रूप में देखा गया है। गुरु का नाम गुरु है तो ऐसा लगता है जैसे स्त्रियों को ज्ञान देने वाले की जरूरत है लेकिन वास्‍तव में गुरु नहीं बल्कि सांसारिकता ज्ञान देती है। गुरु इसी सांसारिकता को रिप्रजेंट करता है। अब चूंकि गुरु किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं करता। हां फल कम या अधिक दे सकता है। ऐसे में अधिकांश स्त्रियों को आँख मूंदकर पुखराज पहनने की सलाह दे दी जाती है। इससे उनके सोचने का नजरिया फैल जाता है। इसी के साथ मोती पहनने की सलाह भी दी जाती है। चंद्रमा का उपचार विचार शृंखला को थामे रखता है। गुरु और चंद्रमा का कांबिनेशन  प्राथमिक स्‍तर पर ही अधिकांश समस्‍याओं का समाधान कर देता है। उन विचारों और कारणों को बढ़ने ही नहीं देता जो चिंताओं को हवा दे। इस तरह महिलाओं को फैशन में ही सही पुखराज और मोती पहन लेने चाहिए। भले ही वे ज्‍योतिष से संबंधित स्‍टोन हैं,  लेकिन खूबसूरत होने के कारण ग्राह्य भी हैं।

शेष शुभम्

2 विचार आए:

  1. प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI said...

    sidharth ji !!!!

    namaskaar!!!

    badhiya vishleshan

  2. Anonymous said...

    aapka lekh nayi jaankaari deta hai. kripya yeh batane ki kripa kare ki neech ke chandra tatha vargottam neech ke chandra ka vyakti par kya prabhav hota hai? dhanyavad.

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