ये क्‍या? कोई ठोस उपचार बताओ

ज्‍योतिष विद्यार्थी - sidharth

ज्‍योतिष के उपचारों के लेकर भले ही मेरे मन में कोई दुविधा न हो लेकिन जातक के जवाब मुझे दुविधा में डाल देते हैं। मैंने ऐसे बहुत कम लोग देखें हैं जिनकी जिन्‍दगी में समस्‍याएं नहीं आती या ऐसी आती हैं कि वे उन्‍हें खुद ही सॉल्‍व कर लें। अधिकांश लोगों की जिन्‍दगी में ऐसी प्रॉब्‍लम्‍स आती है जब वे ईश्‍वर के पास या अपने अंतर्मन के पास जाते हैं। मैं कृष्‍णामूर्ति के हवाले से कह सकता हूं कि दैनन्दिन जिन्‍दगी में जो लोग मानसिक रूप से सक्रिय होते हैं और छोटी-बड़ी घटनाओं के प्रति संवेदनशील होते हैं उन्‍हें ज्‍योतिषी के पास जाने की आवश्‍यकता ही नहीं पड़ती। ऐसे लोग कौन हैं इस बारे में मैं फिर किसी और दिन किसी और पोस्‍ट में लिखूंगा। हां दूसरी तरह के लोग होते हैं जो घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता खो देते हैं और उस स्थिति में पहुंच जाते हैं जिनके लिए उन्‍होंने प्रयास ही नहीं किया था। ऐसे में वर्तमान स्थिति से निकलने के लिए ये लोग ज्‍योतिषी का सहारा लेते हैं। एक जातकों का एक प्रकार है। मैं सभी की बात नहीं कर रहा। ठीक है  सामान्‍य लोग सामान्‍य समस्‍याएं। किसी को नौकरी नहीं मिल रही, किसी को शादी करनी है, कोई इंटरव्‍यू में पास होना चाहता है तो कोई घर में शांति चाहता है। 


समस्‍या कितनी गंभीर है? यह आप सोचकर बताएं, मैं उपचार बताता हूं। 

किसी एक को बताया जेब में भिंडी रखो इंटरव्‍यू में सफल होवोगे, दूसरे को बताया छोटे भाई को कपड़े दिलाओ, किसी को बताया कि मां की सेवा करो, काली मिर्च खाओ,  गर्म खाना रसोई में खाओ... इसी तरह के अनन्‍त उपचार हैं। अब समस्‍याएं इतनी बड़ी और उपचार छोटा। लोग कहते हैं पंडित जी कोई ठोस उपचार बताओ। यानि ऐसा उपचार जिसमें पैसा और समय अच्‍छी मात्रा में बरबाद हो सके। समस्‍या यह है कि पंडित जी पैसा नहीं लेते तो बेचारे जातक को बिना बात कैसे मूंड दे। मेरे एक ज्‍योतिषी मित्र (माफ करें, वे मुझसे काफी सीनियर हैं)  तो स्‍पष्‍ट कहते हैं किसी का पैसा खर्च कराओ या शरीर तभी उपचार होगा। वरना जातक धक्‍के में ही रहेगा कि पंडितजी ने यों ही निकाल दिया। यहां समझने की जरूरत है। ज्‍योतिष के साथ एक और भ्रांति जुड़ी है वह यह कि उपचार देवताओं के नाम पर होते हैं और दान पुण्‍य के रूप में होते हैं। ऐसा नहीं है। ज्‍योतिष की कई किताबों में कई योग ऐसे भी हैं जिनके कारण जातक दान भी नहीं कर सकता। यह उसके भाग्‍य को मंदा करता है। 
मैंने सोचा है कि इस बार किसी जातक ने ठोस उपचार पूछा तो उसे दस लैपटॉप गरीब ब्‍लॉगरों को दान करने के लिए कहूंगा। 

4 विचार आए:

  1. संगीता पुरी said...

    ज्‍योतिष के साथ एक और भ्रांति जुड़ी है वह यह कि उपचार देवताओं के नाम पर होते हैं और दान पुण्‍य के रूप में होते हैं। बहुत गलत भ्रांतियां है । इससे हम ज्योतिषियों को परेशानी होती है।

  2. पहला गरीब ब्‍लॉगर said...

    वो दस की सूची भी आप ही दे देना और मेरा नाम पहला ही लिख लेना। हम भी क्‍या याद करेंगे।

  3. गरिमा said...

    सहमत हूँ, उपचार सस्ते हो तो काम नही करता, क्योंकि सबको पसन्द है ज्यादा खर्च करना... और इतना ही नही सस्ते उपचार बताओ तो आप अच्छे ज्योतिषी भी नही हैं... वेल तो मै तो आराम से देखकर उपचार बताती हूँ कि बन्दा आखिर कैसा उपचार चाहता है :)

  4. सिद्धार्थ जोशी said...

    मुझे पहला गरीब ब्‍लॉगर तो मिल गया है। बाकी गरीब भी आमंत्रित है। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर जल्‍दी अपना नाम दर्ज करा दें। पता नही कब कोई ठोस उपचार वाला जातक मिल जाए। :)

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